मजदूरों को ही नही पता क्या है मजदूर दिवस
उत्त
जहां पूरा विश्व मजदूर दिवस मना रहा है वही काम कर रहे इन मजदूरों को यह भी नही पता कि आज मजदूर दिवस है दो वक्त की रोटी के लिए जद्दोजहद कर रहे इन मजदूरों को आखिर कब पता चलेगा कि इनके नाम से नेताओ और अधिकारियों के द्वारा बड़े बड़े कार्यक्रम और सेमिनार की जा रही है और कब इनको इनका हक मिलेगा आज भी सही मायने में मजदूर हर देश की रीढ़ है फिर भी कई जगहों पर इनका शोषण हो रहा है किन्तु आजादी के 7 दसक बीत जाने पर भी आजतक इनकी स्थिति जस की तस ही है और इनके नाम पर मनाया जाने
वाला यह दिवस कार्यक्रमो तक ही सिमट कर रह गया है सही मायने में 80 प्रतिशत से भी ज्यादा कामगार मजदूरों को इस दिवस की भनक तक ही नही है वही सहकारी और सरकारी महकमा मजदूरों के लिए धरातल पर काम करता नही दिखाई देता यदि सही मायने में काम करता तो 7 दसक बाद यह स्थिति न होती । सवाल यह उठता है कि क्या मजदूरों के हितों के लिए जमीनी स्तर पर कभी काम होगा या मजदूरों के नाम पर मजदूर दिवस में हवाई कार्यक्रम ही किये जायेंगे? यह तो आने वाला समय ही बताएगा।
उत्त
जहां पूरा विश्व मजदूर दिवस मना रहा है वही काम कर रहे इन मजदूरों को यह भी नही पता कि आज मजदूर दिवस है दो वक्त की रोटी के लिए जद्दोजहद कर रहे इन मजदूरों को आखिर कब पता चलेगा कि इनके नाम से नेताओ और अधिकारियों के द्वारा बड़े बड़े कार्यक्रम और सेमिनार की जा रही है और कब इनको इनका हक मिलेगा आज भी सही मायने में मजदूर हर देश की रीढ़ है फिर भी कई जगहों पर इनका शोषण हो रहा है किन्तु आजादी के 7 दसक बीत जाने पर भी आजतक इनकी स्थिति जस की तस ही है और इनके नाम पर मनाया जाने
वाला यह दिवस कार्यक्रमो तक ही सिमट कर रह गया है सही मायने में 80 प्रतिशत से भी ज्यादा कामगार मजदूरों को इस दिवस की भनक तक ही नही है वही सहकारी और सरकारी महकमा मजदूरों के लिए धरातल पर काम करता नही दिखाई देता यदि सही मायने में काम करता तो 7 दसक बाद यह स्थिति न होती । सवाल यह उठता है कि क्या मजदूरों के हितों के लिए जमीनी स्तर पर कभी काम होगा या मजदूरों के नाम पर मजदूर दिवस में हवाई कार्यक्रम ही किये जायेंगे? यह तो आने वाला समय ही बताएगा।
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