जिला मुख्यालय निःशुल्क उपकरण वितरण शिविर रहा असफल
इस बार भी शिविर से खाली हाथ लौटना पड़ा बुजुर्गों और दिव्यांगों को।
उत्तरकाशी। जिले में समाजकल्याण विभाग एवं एलिस्को के सहयोग से राष्ट्रीय वयोश्री एवं ऐडिप के तहत वरिष्ठ नागरिकों एवं दिव्यांगों हेतु निशुल्क नित्य जीवन सहायक उपकरण वितरण हेतु जिले में सभी विकासखंडों में 30 जून से 6 जुलाई तक शिविर लगाए गए है। 6 जुलाई को आखिरी दिन जिला मुख्यालय में शिविर का आयोजन हुआ परंतु शिविर में बहुत कम लोगों का पंजीकरण हुआ पंजीकरण 100 का आंकड़ा भी पार नही कर पाया, शिविर में खाली पड़ी कुर्सियों से अंदाजा लगाया जा सकता है जबकि शिविर मुख्यालय में होने से काफी अधिक लाभार्थियों का पंजीकरण होना चाहिए था परन्तु पूर्व में समाजकल्याण विभाग द्वारा लगाए गए शिविर में कई लाभार्थियों का पंजीकरण किया गया और आजतक उपकरण नही दिए गए जिसकारण लोगों का आज के शिविर में विश्वास नही रहा और लोंगो ने शिविर में पंजीकरण नही करवाया जिससे जिला मुख्यालय का शिविर असफल रहा महज खानापूर्ति ही साबित हुआ। पुर्व के शिविर में पंजीकृत लाभार्थियों को उपकरण न दिए जाना भी कम पंजीकरण का एक कारण है की बात शिविर में उपस्थित चिकित्सक ने भी स्वीकार की । वहीं जब इस बाबत समाजकल्याण अधिकारी हेमलता पाण्डे से दूरभाष से बात की गई तो उन्होंने गैरजिम्मेदाराना ढंग से कहा कि मैं आपका जवाब देने के लिए बाध्य नही हूँ । सवाल ये उठते हैं कि
जब आयोजक ही जवाब देने के लिए बाध्य नही है तोआखिर जवाबदेही किसकी होगी?
क्या सरकार की इन लाभकारी योजनाओं से आमजन ऐसे ही गैर जिम्मेदार अधिकारियों के वजह से महरूम होना पड़ेगा?
इस बार भी शिविर से खाली हाथ लौटना पड़ा बुजुर्गों और दिव्यांगों को।
उत्तरकाशी। जिले में समाजकल्याण विभाग एवं एलिस्को के सहयोग से राष्ट्रीय वयोश्री एवं ऐडिप के तहत वरिष्ठ नागरिकों एवं दिव्यांगों हेतु निशुल्क नित्य जीवन सहायक उपकरण वितरण हेतु जिले में सभी विकासखंडों में 30 जून से 6 जुलाई तक शिविर लगाए गए है। 6 जुलाई को आखिरी दिन जिला मुख्यालय में शिविर का आयोजन हुआ परंतु शिविर में बहुत कम लोगों का पंजीकरण हुआ पंजीकरण 100 का आंकड़ा भी पार नही कर पाया, शिविर में खाली पड़ी कुर्सियों से अंदाजा लगाया जा सकता है जबकि शिविर मुख्यालय में होने से काफी अधिक लाभार्थियों का पंजीकरण होना चाहिए था परन्तु पूर्व में समाजकल्याण विभाग द्वारा लगाए गए शिविर में कई लाभार्थियों का पंजीकरण किया गया और आजतक उपकरण नही दिए गए जिसकारण लोगों का आज के शिविर में विश्वास नही रहा और लोंगो ने शिविर में पंजीकरण नही करवाया जिससे जिला मुख्यालय का शिविर असफल रहा महज खानापूर्ति ही साबित हुआ। पुर्व के शिविर में पंजीकृत लाभार्थियों को उपकरण न दिए जाना भी कम पंजीकरण का एक कारण है की बात शिविर में उपस्थित चिकित्सक ने भी स्वीकार की । वहीं जब इस बाबत समाजकल्याण अधिकारी हेमलता पाण्डे से दूरभाष से बात की गई तो उन्होंने गैरजिम्मेदाराना ढंग से कहा कि मैं आपका जवाब देने के लिए बाध्य नही हूँ । सवाल ये उठते हैं कि
जब आयोजक ही जवाब देने के लिए बाध्य नही है तोआखिर जवाबदेही किसकी होगी?
क्या सरकार की इन लाभकारी योजनाओं से आमजन ऐसे ही गैर जिम्मेदार अधिकारियों के वजह से महरूम होना पड़ेगा?
सब अधिकारी मदहोश है जनता की चिंता मन में जनता के ही रह जाएगी क्योंकि ईन साहब लोगों की तनख्वाहों मे क्या फर्क़ पड पड़ेगा भाई तो इनको क्या चिन्ता विकलांगों की बेवकूफ़ बनाने के लिए बुलाया जाता है ईन बेचारों को.
जवाब देंहटाएंस्वास्थ्य विभाग की टीम बहुत ही अव्यवहारिक थी। क्षेत्र की जनता से किस तरह बात की जाती है इन्हें समझ नहीं आता। हद तो तब हो गयी जब टीम के एक व्यक्ति ने एक विकलांग व्यक्ति से विकलांगता प्रतिशत कम होने के विषय में प्रश्न का जवाब यह मिला कि जब आप लोग रुपये खर्च करके जिला अस्पताल जाते हो तब भी तो पैसा लगाते हो तो आपको यहां फ्री में 60% का सर्टिफिकेट बना कर दे दें क्या?
जवाब देंहटाएंअब यदि ये कहा जाए कि चिन्यालीसौड में जनप्रतिनिधियों द्वारा इनका विरोध किया गया तो मुझे नहीं लगता कि कुछ गलत किया गया।