कास्तकारों के प्रेरणा श्रोत बने भटवाड़ी के उत्तम पंवार
अपने कारनामे से सरकारी तंत्र को दिखाया आईना
भटवाड़ी
भटवाड़ी मुख्यालय में उत्तम सिंह पंवार ने विषम परिस्थितियों में कम उंचाई पर कड़ी मेहनत व लगन से सेब की बागवानी व मौन पालन कर अपनी आमदनी को बढ़ाने के साथ बेरोजगार युवाओं को बागवानी की और आकर्शितकिया है।
स्नातक तक पढ़ाई करनें के बाद उत्तम सिंह ने हिमांचल प्रदेश के कास्तकारों से प्रेरणा ली और हिमाचल में सेब के बागवानी की बारीकी से जानकारी जुटायी तथा साथ ही वहां से उन्नत प्रजाती के सेब के पेड लाये इन्हौंनें विभिन्न प्रकार की प्रजातियों के 190 सेब के पेड़ों की बागवानी बनायी जिसमें ,फ्रांस की सुपर चीफ,नीदरलेंड के रेडचीफ व इजराइल के अन्ना व रेडविलोक्स जैसी प्रजातियों के पेड़ों की बागवानी तैयार की आज 6 साल बीत जानें के बाद स्थिति यह है कि इनके बगीचें में कुछ पेड़ों पर सेब के फल दिखनें लगे है तो कुछ तैयार हो रहे है उत्तम सिंह का कहना है कि उत्तराखण्ड में बागवानी और मौन पालन जैसी रोजगारपरक योजनाओं से बेहतर कोई काम नहीं हैं जरूरी नहीं की हम सेब की ही बागवानी करें आडू,खुबानी,नाषपती व किवी की बागवानी करके भी आमदनी को बढाया जा सकता है प्रत्येक परिवार के पास यदि 100 फलदार पेड़ों की बागवानी हो तो लोगों को कुछ और रोजगार करनें की जरूरत ही नहीं पड़ेगी साथ ही इनका कहना है कि मेरा बगीचा सघन बागवानी पर आधारित है इस तकनीक में पेड़ों को अपने तरीके से साइज देना पड़ता है और पेड़ को ज्यादा उत्पादक बनाना पड़ता है ताकि कम जगह पर ज्यादा उत्पादन मिल सके भटवाड़ी मुख्यालय में उत्तम सिंह पहले बागवान हैं जिन्हौने निचली घाटी में सेब की बागवानी की षुरूवात की वर्तमान में मौन पालन के लिए इन्होनें 30 डब्बे लगा रखे है जिससे षहद निकालकर इनकी अच्छी आमदनी हो जाती है इन्है सरकारी विभागों से यही षिकायत है कि जो पात्र लोग हैं उन्है सरकारी लाभकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलता है और जो अपात्र लोग है वो इन योजनाओं का लाभ ले लेते हैं ।
अपने कारनामे से सरकारी तंत्र को दिखाया आईना
भटवाड़ी
भटवाड़ी मुख्यालय में उत्तम सिंह पंवार ने विषम परिस्थितियों में कम उंचाई पर कड़ी मेहनत व लगन से सेब की बागवानी व मौन पालन कर अपनी आमदनी को बढ़ाने के साथ बेरोजगार युवाओं को बागवानी की और आकर्शितकिया है।
स्नातक तक पढ़ाई करनें के बाद उत्तम सिंह ने हिमांचल प्रदेश के कास्तकारों से प्रेरणा ली और हिमाचल में सेब के बागवानी की बारीकी से जानकारी जुटायी तथा साथ ही वहां से उन्नत प्रजाती के सेब के पेड लाये इन्हौंनें विभिन्न प्रकार की प्रजातियों के 190 सेब के पेड़ों की बागवानी बनायी जिसमें ,फ्रांस की सुपर चीफ,नीदरलेंड के रेडचीफ व इजराइल के अन्ना व रेडविलोक्स जैसी प्रजातियों के पेड़ों की बागवानी तैयार की आज 6 साल बीत जानें के बाद स्थिति यह है कि इनके बगीचें में कुछ पेड़ों पर सेब के फल दिखनें लगे है तो कुछ तैयार हो रहे है उत्तम सिंह का कहना है कि उत्तराखण्ड में बागवानी और मौन पालन जैसी रोजगारपरक योजनाओं से बेहतर कोई काम नहीं हैं जरूरी नहीं की हम सेब की ही बागवानी करें आडू,खुबानी,नाषपती व किवी की बागवानी करके भी आमदनी को बढाया जा सकता है प्रत्येक परिवार के पास यदि 100 फलदार पेड़ों की बागवानी हो तो लोगों को कुछ और रोजगार करनें की जरूरत ही नहीं पड़ेगी साथ ही इनका कहना है कि मेरा बगीचा सघन बागवानी पर आधारित है इस तकनीक में पेड़ों को अपने तरीके से साइज देना पड़ता है और पेड़ को ज्यादा उत्पादक बनाना पड़ता है ताकि कम जगह पर ज्यादा उत्पादन मिल सके भटवाड़ी मुख्यालय में उत्तम सिंह पहले बागवान हैं जिन्हौने निचली घाटी में सेब की बागवानी की षुरूवात की वर्तमान में मौन पालन के लिए इन्होनें 30 डब्बे लगा रखे है जिससे षहद निकालकर इनकी अच्छी आमदनी हो जाती है इन्है सरकारी विभागों से यही षिकायत है कि जो पात्र लोग हैं उन्है सरकारी लाभकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलता है और जो अपात्र लोग है वो इन योजनाओं का लाभ ले लेते हैं ।
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