गंगा जल से भाव पूर्वक तर्पण देने से होता है पितरों का उद्धार : मानस प्रेमी

भागवत ही मोक्ष का द्वार है

उत्तरकाशी

कथा वक्ता शांति भाई "मानस प्रेमी" ने कृष्ण जन्म के अवसर पर भक्तों को अपनी कथा और भजनो से झूमने को मजबूर किया कृष्ण भजन "हाथी घोड़ा पालकी जय कनैया लाल की" के भजन सुरु होते ही पूरा कथा पांडाल झूम उठा  और कृष्ण भक्ति के बसीभूत होकर सभी नाचने को मजबूर हो गए।
 आपको बता दे श्रीमती सुभागा देवी के द्वारा अपने स्वर्गीय पति रत्नमणि ब्यास के वार्षिक श्राद्ध के अवसर पर हनुमान मन्दिर उत्तरकाशी में श्रीमद भागवत महापुराण का आयोजन किया जा रहा है जिसके मंडपाचार्य प.वीरेंद्र नौटियाल है। कृष्ण जन्म की कथा के दौरान कथा वक्ता मानस प्रेमी ने बलराम के जन्म से जुड़ी  कथा को बिस्तार पूर्वक बताया उन्होंने पितरो के उद्धार के के प्रसंग में गंगा के अवतरण की कथा सुनाई उन्होंने बताया कि पितृ पक्ष में पितरों को गंगा नदी के जल से भाव पूर्वक तर्पण करना चाहिए  इससे निश्चित ही पितरों का उद्धार होता है। मानस प्रेमी ने देवकी विवाह से। लेकर कारागार ,और देवकी के सात पुत्रों के जन्म की की कथा सुनाई आठवे गर्व में  कृष्ण के अवतारार और उसे नंद के घर पहुचाया तथा वहां  से ।महामाया जगदम्बा को ले आये इसका पूरा ब्रितान्त बताया कृष्ण के जन्म की की कथा आते ही कथा मण्डप में भक्ति का माहौल हो गया।  "नंद घर आनन्द भयो जय कनैया लाल की" के भजन पर सभी भक्त झूमने को मजबूर हो गए और सभी ने पुष्प वर्षा कर कृष्ण जन्म की एक दूसरे को बधाई दी।

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