राजधानी में राजनीतिक पार्टियों की रैलियों ने बढ़ाई आम राहगीरों की मुश्किलें,रैलियों के दौरान घण्टो जाम में फंसा रहना पड़ता है,जिससे होती है परेशानी
देहरादून
राजधानी देहरादून मे आये दिन रैलियों के आयोजन होने से सड़कों पर जाम लगना अब आम बात हो गया है जिस कारण आम जनजीवन बेहाल हो रहा है राजधानी में आये दिन किसी न किसी पार्टी का कुछ न कुछ आयोजन लगा ही रहता हैं और रैलियों में भारी दलबल के साथ में लोग शामिल रहते है अब शासन को सुरक्षा की दृष्टि से यातायात के लिए अलग दिशा निर्देश होते है जो की सही भी है परंतु दिक्कत वहां पर शुरू होती हैं जब 20 मिनट के रास्ते मे 2 घंटे वाहन को जाम में फंसे रहने के दौरान लग जाते है उससे बुरी स्थिति तब होती है जब कि कोई बिमार व्यक्ति यदि इस जाम मे फंस जाये कोई सडक खुली नहीं मिलेगी जहाँ से उसे निकला जा सके।एक और जहाँ 28 दिसम्बर को कॉग्रेस ने स्थापना दिवस पर भीड़ इकट्ठी की वही भाजपा भी कहां पीछे रहती भाजपा ने भी 29 दिसम्बर को नागरिकता संशोधन बिल के समर्थन में बिशाल रैली का आयोजन कर डाला दोनो ही दिन राजधानी की सड़कों पर जाम लगा रहा लेकिन पार्टियों को जनता की परेशानी से क्या वास्ता दोनो ही पार्टियां अपनी अपनी रैलियों के सफल होने से खुश है चाहे उस दौरान राजधानी में जनता कितनी परेशान रही हो चाहे निष्कर्ष कुछ भी हो ।समय रहते इस तरह के आयोजनों के प्रबंधन के लिए साशन प्रशासन को समाधान ढुंढना अति आवश्यक हो गया है जिससे आम लोग त्रस्त न हो।
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