अफसोस : भटवाड़ी उत्तराखंड की एक ऐसी परगना है जहां तहसील मुख्यालय में एसडीएम कार्यालय ही नही है , डीएम मयूर दीक्षित के भटवाड़ी दौरे से स्थानीय लोगो को कस्वे में दुवारा रौनक लौटने की उम्मीद जगी
उत्तरकाशी
उत्तर प्रदेश से अलग हुए उत्तराखंड प्रदेश को 20 वर्ष हो गए हैं किन्तु उत्तराखंड के दूरदराज की परगना,तहसीलों की स्थिति आज भी जस की तस बनी हुई है उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड इसलिए अलग हुआ ताकि यहां के छोटे छोटे जिलों और प्रगनाओं का विकास हो किन्तु आज इसका उलट ही दिख रहा है जिसका ज्वलन्त उदाहरण तहसील मुख्यालय भटवाड़ी है जो कि चीन सीमा से लगा होने के साथ साथ विश्व प्रसिद्ध गंगोत्री धाम जाने का मुख्य पड़ाव पड़ता है विगत कुछ वर्षों से तहसील मुख्यालय अपनी बदहाली के आंसू बहा रहा है। आखिर तहसील मुख्यालय की बदहाली के जिम्मेदार कौन ? क्या भटवाड़ी क्षेत्र के चुने हुए जन प्रतिनिधि या फिर जिम्मेदार अधिकारी है जो जिला मुख्यालय में ही केम्प कार्यालय बनाकर कुंडली मारे हुए है उत्तराखंड में भटवाड़ी एक ऐसी तहसील है जहां तहसील मुख्यालय में एसडीएम का कार्यालय ही नही बना है जबकि सभी तहसीलों में एसडीएम ऑफिस है और एसडीएम विधिवत बैठते है। जिम्मेदार अधिकारियों के न रहने से इस कस्वे में तमाम असुविधाओं का अंबार लगा है और असुविधाओं के कारण यहां से काफी लोग पढ़ाई और अन्य कारणों से जिला मुख्यालय उत्तरकाशी में प्लायन कर चुके हैं सरकार भले ही प्लायन आयोग का गठन कर रही हो पर धरातल पर कुछ और ही नजर आ रहा है। जिससे अंदाजा लगाना कठिन नही होगा कि उत्तराखंड में दूरदराज की परगना,तहसीलों के लोगो का कैसा विकास हो रहा होगा। सोमवार को तहसील भटवाड़ी के दौरे पर जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के आने से और सभी अधिकारियों को निर्देशित करने से एकबार फिर भटवाड़ी के वाशिन्दों को कस्वे की रौनक लौटने की उम्मीद जगी है अब देखने वाली बार यह होगी कि डीएम मयूर दीक्षित भटवाड़ी के लोगो की उम्मीदों पर कितने खरे उतरते हैं ये तो भविष्य के गर्व में छिपा है फिलहाल डीएम के दौरे से यहां लोगो मे नई आस जगी है।
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