भगवान श्रीकृष्ण की रास लीलाओं के रंगों से सराबोर है पूरा भारत वर्ष , 12 बजे रात्रि को श्रीकृष्ण जन्म समय के इन्तजार में भजन और रासलीला के गीतों को गाकर मद मस्त है भक्त श्रद्धालु

उत्तरकाशी



भगवान श्रीकृष्ण की रास लीलाओं के गीतों किया धुनों पर भारत वर्ष के सभी घरों और मन्दिरों में मद मस्त होकर श्रद्धालु नृत्य कर रहे हैं और उस समय का इंतजार कर रहे हैं जिस समय पूरे ब्रम्हांड के नायक, संचालक जो कई नामो से जाना जाता है उसका जन्म होने का समय हो और जन्म उत्सव मना सके। भगवान श्रीकृष्ण का योगदान द्वापर युग मे सराहनीय रहा है उनकी बाल लीलाओं के कई वर्णन है जन्म होते ही उनके माता पिता बसुदेव और देवकी की कारागार में हथकड़ियां और बेड़िया खुल गयी, पूतना बध,कालिया नाग बध,गुरुकुल में सुदामा और अन्य गोपियों के साथ ठिठोली,आदि कई कहानियां विद्यमान है युवा अवस्था मे कंस बध,गोवर्धन पर्वत उठाकर इन्द्र के घमंड को चूर करने सहित अनेको कहानियां प्रचलित है कौरव और पांडव के युद्ध महाभारत में अर्जुन को गीता के उपदेश सुनाकर महा ग्रथ गीता की रचना की और अंत मे पांडवो को मोक्ष का रास्ता दिखाकर स्वयं बैकुंठ धाम प्रस्थान कर गए और मनुष्य को जीवन को किस तरह से जीना है अपनी 16 कलाओं के द्वारा सीखा गए। कृष्णा भक्ति शाखा के लोग सदियों से श्रीकृष्ण जन्म दिवस भादो के महीने में शिद्दत से मनाते हैं और उनके जन्म समय 12 बजे रात्रि के इन्जार में इनके गीतों और भजनों को गाकर खुशी मनाते हैं।



 


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