अनूठी है गंगोत्री धाम की लंगर परम्परा , चार छटांग चावल देकर धाम के पुरोहितों के पितरों (पूर्वजो) ने रखी थी नीव
उत्तरकाशी
नोट :- कैसी चलती है गंगोत्री धाम में लंगर इसकी वीडियो देखने के लिए नीचे लिखी लिंक को क्लिक करे।
गंगोत्री धाम में अनूठी है यहां की लंगर परम्परा जिसमे सभी गीले शिकवे भुलाकर एक साथ एक छत के नीचे गंगोत्री धाम के पंडा समाज के लोग साथ बैठकर भोजन प्रसाद ग्रहण करते है।
आपको बता दे धाम में यंहा की लंगर परम्परा को कई सालों से यहां के पितरों (पूर्वजो) ने चार छटांग चावल देकर इसकी नीव रखी थी और गंगोत्री धाम की व्यवस्था को बनाने में अपनी अहम भूमिका अदा की थी क्यो कि उस जमाने गंगोत्री धाम में रहने और खाने की कोई उचित सुविधा नही हुआ करती थी उस समय के बुजुर्गों ने मन्दिर समिति के द्वारा यहां पर आनेवले श्रद्धालुओं और स्वयं के लिए लंगर परम्परा की शुरूआत की थी ताकि धाम में आने वाले यजमान और पुरोहित एक साथ एक छत के नीचे बैठकर भोजन प्रसाद ग्रहण कर सके ताकि आपसी भाई चारा और धार्मिक सौहार्द बना रहे आज गंगोत्री धाम में आधुनिकरण होने के बावजूद भी यहां के पंडा समाज के लोग लंगर में ही भोजन करते है और माँ गंगा को लगने वाला राज भोग भी इसी लंगर में ही बनाया जाता है भले ही आज यह लंगर भक्तों की दान राशि पर चल रही है किन्तु इसकी शुरुआत चार छटांग चावल देकर धाम के पुरोहितों के पितरों (पूर्वजो) ने किया था और उनकी यह व्यवस्था कई वर्षों तक चली है और आज इसका व्यापक रूप हो चुका है
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