लोकडाउन में जैविक खेती से ताजी सब्जी बेचकर कर की हजारों की आमद
उत्तरकाशी
कहते है जहां चाह है वंहा राह है ये कहावत चरितार्थ होती है मातली गांव निवासी प्रेमा बधानी और देव बधानी पर इन दोनों दम्पत्ति ने लोकडाउन में समय का सदुपयोग कर लोगो को बेची हजारों की ताजी सब्जी।
आपको बता दे लोकडाउन में सभी के आगे आर्थिक संकट आया किन्तु डुंडा प्रखंड के मातली गांव निवासी प्रेमा बधानी और देव बधानी ने अपने घर के नजदीक बंजर पड़े खेतो से लोकी,कद्दू,भिंडी,मटर,गोबी,शिमला मिर्च,बीन्स आदि जैविक सब्जियां उगा कर लोकडाउन मे सम्य का सदुपयोग तो किया ही बरन खुद की आर्थिकी को भी उभारा जो कि सभी के लिए आज प्रेरणा के श्रोत बने हुए है प्रेमा बधानी जो पेसे से सामाजिक कार्यकर्त्री है इनका लम्बा समय सामाजिक सस्थाओ में काम करके बीता है लोकडाउन में कोई काम नही चला तो सब्जी से अपनी आर्थिकी को ऊपर उठाया है वही उनके पति देव बधानी पेसे से फोटोग्राफी ब्यवसाय से जुड़े है लोकडाउन में इनका भी काम नही चला तो जैविक खेती करने में पत्नी की मदद कर हाथ बंटाया और हजारों की ताजी सब्जी उगा कर बेची है। अगर इंसान ने कुछ करने की ठान ली तो आसमा भी झुक जाता है जिसका जीता जागता उदाहरण मातली गांव के दम्पति प्रेमा और देव है जो कि आसपास के क्षेत्र में लोगो के लिए प्रेरणा के श्रोत बन गए हैं इनके बगीचे से लोग ताजी सब्जी लेने घर पर ही पहुंच रहे हैं।
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