मा चन्दोमति के दर्शनों से होती है पूरी मनोकामनाएं , नवरात्रि में भक्तों का तांता लगा रहता है माँ के दरबार में मनोती मांगने के लिए
उत्तरकाशी
आगर आप कोई मंनोति मांगना चाहते हैं तो चले आइए मा चन्दोमति के दरबार मे यहां पर दर्शन मात्र से ही आत्मिक शांति मन की सुधि प्रदान होती है माँ का मंदिर विकासखण्ड भटवाड़ी के मल्ला और पाही गांव के बीच स्थित है यहां पहुचने के लिए जिला मुख्यालय उत्तरकाशी से मल्ला गांव तक वाहन आसानी से मिल जाते है इसके बाद लगभग 2 किमी पैदल मल्ला गांव के बीच गांव का नजारा लेकर पहुचा जा सकता है और दूसरा रास्ता जो कि वाहन से बीआरओ केम्प भटवाड़ी के पास से जाता है जो सीधे पाही गांव के नीचे मा के मन्दिर के ऊपर पहुचता है तीसरा रास्ता पैदल का है जो विधुत विभाग के सब स्टेशन के पास से जाता है जो खेतों के बीच 3 किमी पैदल चलकर पहुचता है आप इनमें से कोई भी रास्ता चुन सकते है मन्दिर में माता की मूर्ति उतपति की कई दन्त कथाएं है पुराने बुजुर्ग बताते है आदिकाल में जब ऋषिकेश, हरिद्वार, देहरादून जाने के लिए पैदल जाना पड़ता था ये बात तव की है उस समय द्वारी गांव का एक ग्रामीण अपनी आवश्यकता की चीजों को लाने के लिए ऋषिकेश गया था वहां से उस दौरान समान पीठ पर या घोड़े खच्चरों पर लादकर लाया जाता था । ग्रामीण को रास्ते मे एक बूढ़ी महिला मिली जिसने अपने चलने में असमर्थता जाहिर कर उस ग्रामीण से स्वयं को सामान के साथ पीठ पर उठाने का आग्रह किया बताया जाता है, कि पहले तो वह ग्रामीण सोच में पड़ गया फिर उसको बूढ़ी महिला पर दया आ गयी और उसने बूढ़ी महिला को सामान के साथ उठा लिया कुछ दूर चला तो उसके अपनी पीठ का भार शून्य लगा मला गांव के ऊपर पहुचकर उस ग्रामीण को शौच जाने की इच्छा हुई उसने एक जगह पर सामान के साथ बूढ़ी महिला को रख दिया और जब आकर देखा तो वो बूढ़ी महिला गायब थी और उसकी जगह एक अष्ट भुजाकार मूर्ति दिखी घर पहुचकर उसने अपने साथ घटित घटना को अन्य ग्रामीणों को बताया ग्रामीणों ने इस मूर्ति को एक मन्दिर बनाकर स्थापित किया तब से यह स्थान मा चन्दोमति के नाम से विख्यात हुआ आसपास के दर्जनों गांव के लोगो का आस्था का केन्द्र है माँ का यह दरबार आजतक जिस भक्त ने सच्ची श्रद्धा से मन्नत मांगी वो खाली हाथ नही लौटा आप भी अगर कोई मन्नत मांगना चाहते हैं तो चले आये के दरबार में मा चन्दोमति के दरबार मे नवरात्रि के समय भक्तों का तांता लगा रहता है
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