सभी के संकट हरने वाली है रैथल गांव की "थात माता" शक्ति पीठ , सिला रूप में दर्शन होते है यहां पर माता के

उत्तरकाशी



अगर सिला रूप में माता के दर्शन करने हो तो चले आइए रैथल गांव में यहां माता के दर्शन सिला रूप में देखने को मिलते है जो कि "थात माता" के नाम से विख्यात है। रैथल गांव एक पर्यटक गांव होने के कारण अधिकतर लोग यहां के नाम से अनजान नही है जिन लोगो को यहा का रास्ता नही पता तो बता दे यहां पहुचने के लिए जिला मुख्यालय उत्तरकाशी से भी बस और टैक्सी आसानी से मिल जाती है तहसील मुख्यालय भटवाड़ी में पुलिस चौकी के सामने से भी टेक्सी आसानी से मिल जाती है। 


आपको बतादे रैथल गांव में "थात माता" सभी के संकट को हरने वाली देवी है यहां पर जो भी भक्त श्रद्धा पूर्वक आता है उसको सभी मनो वांछित फलों की प्राप्ति होती है। रैथल गांव के निवासी डा0 कुलानंद रतूड़ी ने बताया कि रैथल गांव की थात माता का वर्णन केदारखण्ड पुराण में मिलता है पुराण के अनुसार भास्कर प्रयाग ( आधुनिक भटवाड़ी) में भागीरथी तट पर सूर्य कुण्ड से लगी भद्र सिला स्थित है यह भद्र सिला भागीरथी तट सूर्य कुण्ड से लेकर गोई नामक स्थान तक फैली हुई है जिसके दोनों और से नवला नदी और मोक्ष दायनी नदी बहती है जिनका केदारखण्ड पुराण में वर्णन मिलता है और भद्र सिला के रूप में माता पार्वती और शिव लिंग भास्करेश्वर महादेव व गोई नामक स्थान पर शेषनाग के रूप में बिराजमान है। पुराण के अनुसार भागीरथी तट पर सूर्य कुण्ड के समीप भद्र सिला पर शिव पार्वती रोज विचरण करने आते थे  एकबार माता पार्वती ने शिवजी से अपनी जिज्ञासा जाहिर कि हम इस स्थान पर रोज विचरण करने आते है इस स्थान पर कुछ ऐसा हो जो हमारे भक्त इस स्थान पर आकर हमारी आराधना करें और मनोवांछित फलों की प्राप्ति करे, भगवान शिव ने माता पार्वती को आशीर्वाद दिया और उन्हें कहा कि तुम इस स्थान पर सिला रूप में पूजी जाओगी जिस सिला का सिर रैथल और पैर सूर्य कुण्ड के पास है। तब से यहां पर सिला रूप में मा पार्वती की पूजा सिला  (स्थानीय भाषा मे थात माता) के रूप में होने लगी मोक्ष दायनी और नवला नदी के बीच मे भद्र सिला के ऊपर उस प्राणी का जन्म होता है जिनके पूर्व जन्मों के संचय फलों के कारण भाग्य उदय होता है। रैथल गांव में माता का शक्ति पीठ भब्य मन्दिर विराजमान है शुद्ध घी के साथ आटे का बना हलवा यहां पर प्रसाद के रूप में चढ़ता है। माता के दर्शन मात्र से मन को सुख शांति की प्राप्ति होती है जो भी माता का भक्त इस सिद्ध पीठ स्थान पर श्रद्धा पूर्वक आता है माता उसके सभी संकट हर लेती है। रैथल गांव में माता के मन्दिर के साथ साथ समेश्वर देवता का भी मन्दिर है जिनको कि "थात माता" के गण के रूप में जाना जाता है इनकी पूजा के बिना थात माता की पूजा अधूरी मानी जाती है। यदि आप भी संकटो का निवारण करना चाहते हो तो चले आइये रैथल गांव "थात माता" के दर्शनों को।


 


प0 अमित रतूड़ी शास्त्री द्वारा दिए गए माता के स्लोगन में प्रमाणिकता



 


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