गंगा, यमुना पहुची अपने अपने मायके , दोनों की भोग मूर्ति गर्व गृह में हुई स्थापित
उत्तरकाशी
जहा पूरा विश्व गंगा ,यमुना को माता के रूप में देखता है वही उत्तरकाशी जिले के मुखवा और खरसाली गांव के लोग आज भी इन्हें बेटी के रूप में मानते हैं पारम्परिक रीति रिवाज से गंगा और यमुना के आगमन और विदाई करते है इन दोनों गांवों के लोग।
विश्व प्रसिद्ध गंगा और यमुना पहुची अपने अपने शीतकालीन प्रवास मायके मुखवा और खरसाली में जहा पर बेटियों के स्वागत में मुखवा और खरसाली गांव के लोगो ने मायके पहुची बेटियों का भब्य स्वागत किया गंगा मैया और यमुना मैया की भोग मूर्ति को गर्व गृह में स्थापित करने के बाद मुखवा गांव और खरसाली गांव के लोग पारम्परिक बाध्य यंत्रों डोल दमाऊं थाप पर रासो तांदी नृत्य कर गांव में बेटी के आने की खुशी मनाने की परंपरा है इन दोनों गांवों में।
मुखवा गांव
बात करें गंगा मैया की तो विगत रात्रि प्रवास देवी मन्दिर से उत्सव डोली मुखवा गांव के लिए अपने सैकड़ो श्रद्धालुओं के जयकारों व सेना के बैंड धुनों के साथ मुखवा गांव पहुची गांव के सभी बूढे ,बच्चे, नर ,नारी ने मन्दिर प्रांगण में पहुचते ही उत्सव डोली का भब्य स्वागत किया और मन्दिर समिति के पदाधिकारियों और पुजारियों ने विधिविधान के साथ भोग प्रसाद चढ़ाकर माता गंगा की भोग मूर्ति को मन्दिर के गर्व गृह में स्थापित कर दिया गया आज से छ माह तक मुखवा गांव स्थित मंदिर में श्रद्धालुओं को मां गंगा के दर्शन होंगे। जलसे मन्दिर समिति के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल,सचिव दीपक सेमवाल,ग्राम प्रधान मुखवा शिवकला देवी,राकेश सेमवाल,संजय सेमवाल के अलावा सैकड़ो की संख्या में भक्त श्रद्धालु मौजूद रहे।
खरसाली गांव
वही यमनोत्री धाम में आज सुबह समेश्वर देवता की डोली अपनी बहिन यमुना को अपने मायके लाने पहुचे मुहूर्त के अनुसार 12 बजकर 15 मिनट पर मन्दिर के कपाट बंद कर दिए गए मां यमुना की उत्सव डोली सैकड़ो भक्त श्रद्धालुओं की जयकारों के साथ अपने मायके शीतकालीन प्रवास के रवाना हुई खरसाली पहुचने पर गांव के सभी लोगो ने बेटी का परम्परागत ढंग से भब्य स्वागत किया इसके पश्चात मन्दिर समिति एवं माता के पुजारियों ने मां यमुना की भोग मूर्ति को खरसाली स्थित मन्दिर के गर्व गृह में स्थापित कर दिया है आज से माता के दर्शन भक्त श्रद्धालुओं को खरसाली में ही होगें।
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