महिलाओं को सिलाई सिखाकर आत्मनिर्भर बनाना चाहती है भटवाड़ी गांव की सन्तोषी




 उत्तरकाशी (राजेश रतूड़ी)

उत्तराखंड सरकार भले ही महिलाओं को लेकर कई योजनाएं संचालित कर रही है क्या ये योजनाएं ग्रामीण अंचल की आम महिलाओं तक पहुच पा रही है इसको भटवाड़ी गांव में सिलाई सेन्टर चला रही सन्तोषी रतूड़ी के सिलाई सेन्टर को देखकर समझा जा सकता है।
  आपको बतादे तहसील मुख्यालय में रहने वाली सन्तोषी ने पहले खुद सिलाई का काम सीखा और अब अन्य महिलाओं को सिखाकर अपनी आजीविका का जरिया बनकर आत्मनिर्भर बन रही है इन्होंने खुद से सुरूआत की और आज इनके पास 40 महिलाएं  सिलाई सीखने आ रही है। इनका जुनून इस कदर है कि ये चाहती है कि भटवाड़ी के आसपास के सभी गांवों में महिलाओं के द्वारा सिलाई सेन्टर खोलना चाहती है किन्तु पर्याप्त संसाधन न होने के कारण इनके हौसले पस्त हो रहे हैं । इनका कहना है कि इनके सिलाई सेन्टर में सिलाई सीखने की डिमांड और भी महिलाएं कर रही है किन्तु इनके सिलाई सेन्टर में न ही पर्याप्त मशीनें है और न ही सेन्टर चलाने के लिए पर्याप्त जगह। वर्तमान समय मे इनका सिलाई सेन्टर भास्करेश्वर मन्दिर के सतसंग हॉल में चल रहा है इनको हमेशा डर सताता रहता है कब मन्दिर का पुजारी सतसंग हॉल खाली करने को बोल दे पता नही है। इनका कहना है कि यदि कोई सरकारी या गैर सरकारी संगठन इनको मशीनें और सेन्टर खुलवाकर इनकी मदद कर दे तो ये आसपास के सभी गांवों में महिलाओं को सिलाई पशिक्षण देकर आत्म निर्भरता की और कदम बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करेंगी। 
अब देखने वाली बात यह होगी क्या कोई सरकारी या गैर सरकारी संगठन ऐसी जुनूनी महिला की मदद को हाथ बढाएंगे या फिर भटवाड़ी गांव की सन्तोषी रतूड़ी का जुनून संसाधनों की कमी के कारण दम तोड़ देगा ये तो आनेवाले समय मे पता चल जाएगा फिलहाल ये महिलाओं को सिलाई सिखाकर स्वय तो आत्मनिर्भर बन रही है बल्कि भटवाड़ी क्षेत्र में महिलाओं की सिलाई ब्रिगेड तैयार कर रही है।

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