राइका सौरा में छात्रों के लिए मूलभत सुविधाओं का टोटा,सरकार के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बेहतर शिक्षा के दावों की असली हकीकत

उत्तरकाशी (राजेश रतूड़ी)



 सरकारें चाहें किसी भी राजनीतिक पार्टी की हो सभी ने ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर शिक्षा देने के दावे किये है किन्तु हकीकत इससे उलट है आज भी ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालर्यो में मूलभूत सुविधाओं का टोटा बना हुआ है जिसका अंदाजा राजकीय इण्टरमीडिएट  कॉलेज सौरा को देखकर  लगाया जा सकता है कि सरकारें दूरदराज क्षेत्रों में शिक्षा की बेहतरी को लेकर कितनी संजीदा है।



आपको बतादे नाल्डकठूड पट्टी के सौरा गांव से लगे सारी,सालू, स्यावा,लाटा गांव के 150 छात्र छात्राएं इस विद्यालय में अध्यन्नरत है। राइका सौरा में बच्चों के लिए मूलभूत सुविधाओं का अभाव होने के कारण यहां पड़ने वाले छात्र छात्राओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
 विद्यालय में न तो बच्चों के लिए खेलने को मैदान और न ही सही से विद्यालय के चारो और चार दिवारी बनी हुई है, न इण्टरमीडिएट  के बच्चों के लिए प्रेक्टिकल लेब है। बिना लेब के बच्चे केसे प्रयोगात्मक कार्य कर रहे होंगे अंदाजा लगाना कठिन नही होगा कि दूरदराज के विद्यालयों की स्थिति केसी होगी। बात करे बैठने के लिए कक्षाओं की तो  हाईस्कूल से उच्चीकरण हुए कुछ समय ही हुआ है किन्तु जो भवन बने भी है ओ भी बेतरतीप ठंग से बने है जो कि छात्रों के बैठने के लिए नाकाफी है। इस क्षेत्र के जन प्रतिनिधियों ने इसके लिए कईबार जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से गुहार लगाने के बावजूद स्थिति जस की तस है गंगोत्री मेल की टीम ने विद्यालय का दौरा किया तो पता चला राइका सौरा में पड़ने वाले छात्र छात्राएं  मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं क्या सरकारें यहां के छात्र छात्राओं को मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवा पाएगी या फिर यह पर पड़ने वाले छात्र छात्राओं को आगे भी ऐसे ही रहना होगा। बच्चो के भविष्य को लेकर बच्चो के अभिभावकों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती है। 

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