ग्रामीणों ने फूल्यार मेले में मनाया इष्ट समेश्वर देवता को और रासो तांदी नृत्य कर झूमें।

विकासखण्ड भटवाड़ी के विभिन्न गांवों  में इष्ट समेश्वर देवता को समर्पित फूल्यार मेला इन दिनों जगह जगह आयोजित हो रहे हैं। फूल्यार मेले को आषाढ़ महीने में धान की रोपाई के बाद मनाने की परंपरा है।   

तेज धार हथियार गंडासे (डांगरों) पर चलता समेश्वर देवता का मानव पशुवा  

समेश्वर देवता को समर्पित इस मेले के लिए गाँवों में तीन चार दिनों से तैयारियां की जाती है गाँव के कुछ युवाओं को दयारा बुग्याल,गिडारा बुग्याल जैसे उच्च हिमालयी क्षेत्रों से समेश्वर देवता के पसंदीदा जयण,लेसर,ब्रम्ह कमल,भूत केश आदि हिमालयी पुष्पों को लाया जाता है। और इष्ट समेश्वर देवता की पूजा अर्चना कर उन्हें समर्पित किया जाता है।  जब समेश्वर देवता मानव पशुवा पर अवतरित होता है तो उनके द्वारा इन पुष्पों को प्रसाद के रूप में जन समूह की तरफ बिखेरा जाता है। और स्वयं तेज धार वाले गंडासो (स्थानीय भाषा में डांगरों) पर चलते हुए ग्रामीणों के पूछे गए प्रश्नों के बारे में बताता है और ग्रामीणों को अपना आशिर्वाद देता है। इसके बाद गाँव के पंचायती चौक में गाँव के सभी नर नारी अपने पारम्परिक परिधानों में रासो तांदी नृत्य कर देवी देवताओं का मंगल गान कर झूमते है।

बारसु गाँव के ऊपर भरनाला ताल के पास रासो तांदी करते ग्रामीण


फूल्यार मेलों को मानने के पीछे क्या मान्यताएं है।


इस क्षेत्र में धान की फसल की रोपाई के बाद ग्रामीणों के द्वारा इष्ट समेश्वर देवता को मनाकर अच्छी फसल व गाँव की खुशहाली की की कामना को लेकर  इस मेले को मनाने की परंपरा है।


लोगों के बीच कैसे विखयात हुए इष्ट समेश्वर देवता।


समेश्वर देवता को लेकर अलग अलग जगहों में अलग अलग किंवदन्तियाँ है। कुछ जगहों पर समेश्वर देवता की पूजा लोग भगवान राम का अंश मानकर राजा रघुनाथ के रूप में करते है और कुछ जगहों पर भेड़ चराने वाले गड़रिये पर मानव रूप में अवतरित होने के रूप में करते है। जब समेश्वर देवता मनुष्य पर गड़रिये के रूप में अवतरित होता है तो मेला स्थल के चारों और से ग्रामीण सीटियां बजाकर उन्हें प्रशन्न करते है। किंवदंती भले ही अलग अलाग जगहों की भिन्न हो पर देवता के द्वारा अपने सत्य वाक्यों और अपने (तेज धार हतियार पर चलकर,गर्म लोहे की रोड़ पर हाथ लगाना इसके बाद भी मनुष्य के शरीर को कोई नुकशान न होना) आदि हैरतंगेज कारनामों से ग्रमीणों और इन कारनामों को देखने वालों के बीच अपने होने का विश्वास आज भी बनाये हुए है। इसलिए ग्रमीणों का सदियों से समेश्वर देवता पर अटूट आस्था और विश्वास है।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

स्मैक के साथ इंद्रा कालोनी उत्तरकाशी का 1 युवक पुलिस के हत्थे चढ़ा

सुक्की टॉप के पास यूटिलिटी वाहन दुर्घटनाग्रस्त एक की मौत तीन घायल

सड़क हादसा : गंगनानी के समीप :बस दुर्घटनाग्रस्त 27 लोग सवार