क्या कभी उत्तराखंड वासियों के लिए पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट "ऑल वेदर रोड" का सपना पूरा होगा या निर्माण एजेंसियां लगाती रहेंगी पलीता

उत्तराखंड में पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट को ऑल वेदर रोड़ पर काम करने वाली निर्माण एजेंसियों के द्वारा सही तकनीकी व सही गुणवत्ता से काम न करके पलीता लगाया जा रहा है। ऑल वेदर रोड यानी हर मौसम में चलने वाली सड़क किन्तु उत्तराखंड के चारों धामों के लिए तथा बॉर्डर एरिया तक पहुचने वाली सड़को की यदा कदा भरभरा जाने की खबरे आम हो रही है। क्या ऐसे में ऑल वेदर रोड का सपना आम आदमी के लिए कभी पूरा होगा यदि होगा तो कैसे होगा यह यक्ष प्रशन्न है।

बतादे बुधवार को उत्तरकाशी के चुंगी बड़ेथी के पास लाखो रुपये खर्चे की ऑल वेदर रोड बरसात के चलते भरभरा गयी जिससे रिहायसी मकानों को भी क्षति हुई है। यह कोई पहला वाकया नही है कि सड़कों पर काम कर रही निर्माण एजेंसियों की निर्माणाधीन या निर्माण की गई दीवारें ढही हो। जो कि निर्माण एजेंसियों की गुणवत्ता व तकनीकी पर तो सवाल खड़े करते ही है परन्तु राजमार्ग की सही गुणवत्ता परखने वाली मोनेटरिंग समिति भी सवालों के घेरे में आ रही है। अब सवाल यह होता है कि आखिर इन सब बातों पर कौन ध्यान देगा और स्पष्ट जाँच कर निर्माण एजेंसियों तथा मोनिटरिंग समिति पर कौन कार्यवाही कर नकेल कसेगा या फिर ऑल वेदर रोड पर काम करने वाली निर्माण एजेंसियों के लिए ऑल वेदर रोड ऐसे ही दुधारू गाय बनी रहेंगी। इसका जवाब केवल राष्ट्रीय राजमार्गों में काम कर रही निर्माण एजेंसियों व राजमार्गों की गुणवत्ता परखने के लिए बनी मोनिटरिंग समितियों के पास है। या फिर पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट पर नियंत्रण कर रही राष्ट्रीय संस्था के पास होगा। निर्माण एजेंसियां आम आदमी की टेक्स के रूप में गाड़ी कमाई पर यू ही हर वर्ष डाका डालती रहेंगी। या कभी सुधार होगा ये तो भविष्य के गर्व में है। यदि जल्दी ही राष्ट्रीय राजमार्गों की तकनीकी और गुणवत्ता के लिए सोचा नही जाता है तो ऐसे में आनेवाले समय में पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट ऑल वेदर रोड का सपना आम आदमी के लिए केवल सपना ही रहने वाला है।

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