जिला स्तरीय अधिकारियों के निराकोट गाँव में हुए नुकशान का जायजा लेने न पहुँचने से ग्रामीण नाराज

आपदा को बीते  लभग 48 घण्टे होने को है किन्तु निराकोट गाँव की सुध लेने जिला स्तर का कोई बड़ा अधिकारी जल प्रलय से हुए नुकशान का जायजा लेने नही पहुंचा जिस कारण स्थानीय लोगों और जन प्रतिनिधियों में रोष व्याप्त है।

जन प्रतिनधियों में रोष

 क्षेप रमेश भट्ट व ग्राम प्रधान जितेंद्र गुसाईं ने बताया कि निराकोट गाँव के ऊपर बादल फटने से जल प्रलय मचा था निराकोट गाँव के तीन चार आवासीय भवन आपदा की जद में आये है तथा गाँव में आने वाले सभी रास्ते और ग्रामीणों के खेत ध्वस्त हुए है किन्तु जिला स्तर के बड़े अधिकारियों का गाँव का मुआयना करने न आना यह दर्शाता है कि जहा आने जाने में सुगमता न हो अधिकारी और नेता ऐसी जगह नही पहुंचते केवल वही पहुँचते है जहां पर सुगमता से पहुंचा जा सके । अधिकारियों के नाम पर केवल खण्ड विकास अधिकारी दिनेश जोशी,आपदा प्रवंधन से मास्टर ट्रेनर मस्तान भण्डारी व राजस्व पटवारी शिव प्रसाद के अलावा जिला स्तर के किसी भी अधिकारी ने गाँव में आने की जहमत नही उठाई। जो कि जिला स्तरीय अधिकारियों की कार्यशैली को दर्शाता है कि दुर्गम क्षेत्रों में ग्रामीणों के प्रति जिला स्तरीय अधिकारियों का क्या रवैया है। जबकि आपदा के बाद गाँव में न तो बिजली है और पाइपलाइन टूटने के कारण न पीने का पानी अधिकारी जिले से ही हवाई निर्देश कर रहे हैं। क्यूआरटी व एसडीआरएफ कुछ जवान रास्तों को खोलने पहुँचे है जो कि नाकाफ़ी है। बिजली और पानी की समस्याएं जस की तस बनी हुई है आनेवाले समय में क्या जिला स्तरीय अधिकारी गाँव की सुध लेने पहुंचेंगे या फिर ग्रामीणों को यू ही अपनी समस्याओ के लिए जूझना होगा 

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