संस्कृत भाषा के उत्थान और व्यापक प्रचार प्रसार को लेकर वेबिनार के माध्यम से हुई चर्चा
उत्तराखंड संस्कृत अकादमी हरिद्वार के द्वारा संस्कृत भाषा के उत्थान और जन जन तक पहुचने के उद्देश्य से एक वेबीनार के माध्यम से गोष्ठी आयोजित हुई। जिसमें उत्तरकाण्ड के विभिन्न जनपदों से संस्कृत वेदाओं ने जुड़कर अपने अपने विचार रखे।

संस्कृत उत्थान गोष्ठी जिसका विषय “उत्तराखंड संस्कृत ग्रामाणां प्रासंगिकता” उत्तराखंड राज्य के 13 जिलों में उत्तराखंड शासन द्वारा संस्कृत ग्राम के अंतर्गत उत्तरकाशी के जसपुर गांव को भी चयनित किया गया है। अकादमी में शोध अधिकारी राज्य संयोजक हरीश चंद्र गुरुरानी ने बताया कि उत्तराखंड राज्य की द्वितीय राजभाषा संस्कृत के उत्थान और प्रचार प्रसार के लिए संस्कृत अकादमी द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। वर्तमान में संस्कृत गान प्रतियोगिता के माध्यम से छोटे छोटे बालक बालिकाएं संस्कृत में अपना परिचय देना सीख रहे हैं। संस्कृत श्लोक गांव स्तोत्र का पाठ कर रहे हैं। उत्तरकाशी में ऑनलाइन के माध्यम से संगोष्ठी में मुख्य वक्ता राकेश कुमार शर्मा प्रांत मंत्री संस्कृत भारती उत्तरांचल के ने कहा कि 13 जनपदों में संस्कृत ग्रामों की स्थापना आनेवाले समय में संस्कृत के उत्थान के लिए मील का पत्थर साबित होगी। जिसके माध्यम से गांव के छोटे-छोटे बच्चे संस्कृत बोलना सीखेंगे आनेवाले दिनों में संस्कृत भाषा जन-जन की भाषा बनेगी। सह वक्ता नरेंद्र पांडे ने कई ऐसे उदाहरण प्रस्तुत किए जो संस्कृत भाषा के व्यापक प्रचार प्रसार के लिए सहायक सिद्ध होंगे। उन्होंने बताया कि कर्नाटक के मत्तूर गांव में प्रत्येक बच्चा संस्कृत भाषा में बात करता है वह बच्चे बड़े होकर अलग अलग सेवाओं में अपना योगदान दे रहे हैं लेकिन वह अपनी भाषा संस्कृत से आज भी जुड़े हुए है कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि प्राचार्य संस्कृत महाविद्यालय पुरोला शिव प्रसाद नौटियाल ने अकादमी के द्वारा किए जा रहे संस्कृत के प्रचार प्रसार के कार्यक्रमों की सराहना की गोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में पीजी कॉलेज उत्तरकाशी के संस्कृत विभागाध्यक्ष देवेंद्र दत्त पैन्यूली द्वारा संस्कृत के उत्थान के लिए उत्तराखंड के सभी संस्कृत महाविद्यालयों में एवं स्कूलों में संस्कृत को रिक्त पदों को भरने की आवश्यकता बताई है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे गुरु राम राय लक्ष्मण संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ राम भूषण बिजलवान ने आधुनिक युग में संस्कृत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए संस्कारवान पीढ़ी पैदा करने के लिए संस्कृत भाषा को महत्वपूर्ण बताया कार्यक्रम में सयोजक चंद्रशेखर नौटियाल, सह संयोजक प्रदीप कोठारी जुड़े रहे। जयतु संस्कृतं जयतु भारतम्
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें