गांव, खेती और पारंपरिक खानपान बचाओ का संदेश लेकर आराकोट पहुंचा यात्री दल,यात्रा में विभिन्न मुद्दों को लेकर लोगों को किया जागरूक

उत्तरकाशी : पारंपरिक विविधता युक्त खेती, पहाड़ी खान-पान एवं गांव बचाओ का संदेश लेकर एक यात्री दल उत्तरकाशी के सीमांत गांव आराकोट पहुंचा। इस दौरान यात्री दल ने विभिन्न स्थानों में ग्रामीणों से संपर्क कर उनकी समस्याओं को जाना और उन्हें यात्रा के उद्देश्यों से अवगत कराया और इसी के साथ ही यात्रा का समापन भी हो गया।

बीज बचाओ आंदोलन और जिला सर्वोदय मंडल टिहरी गढ़वाल के बैनर तले अस्कोट से आराकोट (उत्तरकाशी) की अध्ययन यात्रा पर निकला यात्री दल देर शाम आराकोट पहुंचा। जहां ग्रामीणों के साथ बैठक के बाद यात्रा का समापन हो गया। इससे पूर्व यात्री दल ने रुदप्रयाग के तिलवाड़ा, अगस्त्यमुनि, जखोली,
चिरबटिया और टिहरी के घनसाली, चमियाला, दल्ला आरगढ़,
केमुण्डाखाल, आबकी, सौड़ और उत्तरकाशी के धौतरी, चौरंगीखाल, धरासु, ब्रह्मखाल, बड़कोट, नौगाँव, पुरोला, मोरी, हनोल, मैदरथ आदि जगहों में वहां के ग्रामीणों से बातचीत की और जाना कि खेती में उन्हें किस प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। गांव में खेती की स्थिति क्या है। खानपान में किस तरह का बदलाव आया है। पशुपालन की क्या स्थिति है। कोरोना महामारी से किस तरह का प्रभाव ग्रामीणों पर पड़ा है। पलायन की स्थिति क्या है आदि के बारे में जानकारी प्राप्त की और ग्रामीणों को यात्रा के उद्देश्य से अवगत कराया। यात्री दल ने अपने अध्ययन में यह पाया कि करीब हर गांव व इलाकों में बंदर और सुअरों द्वारा खेती को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, जिस कारण किसान खेती छोड़ रहे हैं। पारंपरिक बीज और जैव विविधता भी खतरे में है। खेती किसानी और पशुपालन वहीं कायम है जहां आज का आधुनिक विकास नहीं पहुंचा। गांव और तीर्थ स्थानों को जोड़ने वाली सड़कें अवैज्ञानिक रूप से बनाई जा रही हैं। पहाड़ कटिंग का पूरा मलबा नदियों में डाला जा रहा है। परिणाम स्वरूप एक तरफ नदियों की जैव-विविधता को नुकसान हो रहा है तो दूसरी तरफ भूस्खलन से नए-नए डेंजर जोन बन रहे हैं।
इस मौके पर आंदोलन के संयोजक विजय जड़धारी ने कहा कि चिपको आंदोलन से जुड़े लोगों द्वारा इससे पूर्व पदयात्राएं की गई हैं और उसी क्रम में अब उत्तराखंड की खेती पर जलवायु परिवर्तन, जंगली जानवरों के हमले, व आधुनिक हरित क्रांति के बाद जहरीली खाद के दुष्परिणामों, पशुधन का संकट, पहाड़ी पोषण युक्त प्रतिरोधी खानपान, हिमालय एवं नदियों पर पर्यावरणीय खतरे और खाली होते गांव का अध्ययन किया जा रहा है। वहीं आंदोलन के प्रवका रघुभाई जड़धारी ने बताया कि यात्री दल आगे बढ़कर विभिन्न गांव के हालातों का अध्ययन करते हुए यात्रा के अंत में उत्तरकाशी जिले के हिमाचल प्रदेश से लगे आराकोट गांव तक पहुंचेगा। उन्होंने बताया कि यह यात्रा इस वक्त बारनाजा की विविधता युक्त खेती, दलहन, तिलहन व दालों की विविधतायुक्त खेती और खलिहान पर अध्ययन करने के लिए आयोजित की गई है। उन्होंने बताया कि यात्रा के अंत में इसकी एक अध्ययन रिपोर्ट तैयार कर सूबे के मुख्यमंत्री को सौंपी जाएगी। यात्री दल में पर्यावरणविद विजय जड़धारी, रघुभाई जड़धारी के इलाहाबाद सर्वोदय मंडल के अध्यक्ष साब सिंह सिंह सजवाण, वरिष्ठ पत्रकार शशि भूषण भट्ट, राम सिंह कुट्टी, गोपाल , सभासद शक्ति प्रसाद जोशी, सिद्धार्थ समीर, रवि गुसांईं, दिनपाल आदि शामिल रहे।

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