गंगा मैया मुखीमठ तथा यमुना मैया खुशीमठ में हुई विराजमान

उत्तरकाशी : विश्व प्रसिद्ध गंगा और यमुना अपने अपने शीतकालीन प्रवास मुखवा (मुखीमठ) व खरसाली (खुशीमठ) स्थित मन्दिर के गर्व गृह में विराजमान हो गयी है। अब शीतकाल में श्रद्धालुओं को माता गंगा और यमुना के दर्शन मुखवा व खरसाली में ही होंगे।

मुखवा (मुखीमठ)

मुखवा : माता गंगा की भोग मूर्ति रात्रि प्रवास भगवती मन्दिर में रही सुबह तीर्थ पुरोहितों के द्वारा पूजन अर्चन के पश्चात माता का जलसा जयकारों के साथ मुखवा गाँव के लिए रवाना हुई जहा पर समेश्वर देवता के साथ गांव के सभी लोग पारंपरिक बाध्य यंत्रों के साथ उत्सव डोली का स्वागत करने गांव से कुछ दूरी तक पहुँचे। मा गंगा की उत्सव डोली के गांव में पहुचते ही गांव में जश्न का माहौल देखने को मिला मन्दिर प्रांगण में ग्रामीणों ने डोल दमाऊ की थाप पर रासो तांदी नृत्य कर मंगल गीत गाकर अपनी खुशी का इजहार किया इसके पश्चात तीर्थ पुरोहितों के द्वारा मन्दिर के गर्व गृह में माता गंगा की भोग मूर्ति को स्थापित किया।

खरसाली (खुशीमठ)

रावल राजस्वरूप उनियाल उपाध्यक्ष मन्दिर समिति

खरसाली : यमुना मैया की भोग मूर्ति को लाने के लिए प्रातः समेश्वर देवता व गुरु अघोरनाथ जी जन समूह के साथ यमुनोत्री धाम पहुँचे। यहां लर तीर्थ पुरोहितों व पदेन अध्यक्ष एसडीएम शालिनी नेगी की मौजूदगी में 12 बजकर 15 मिनट पर मन्दिर के कपाट बंद कर दिए गए।

यमुना मैया की जयकारों के साथ सैकड़ो की संख्या में भक्त श्रद्धालु उत्सव डोली के साथ खरसाली के लिए जलसे में शामिल हुए।

 खरसाली गांव में यमुना मैया की उत्सव डोली को शनिदेव मन्दिर प्रांगण में लाया गया जहां पर ग्रामीणों ने बेटी की तरह उत्सव डोली का स्वागत किया पारंपरिक डोल दमाऊ की थाप पर रासो तांदी नृत्य कर मां यमुना से क्षेत्र की खुशहाली के लिए मंगल कसमना की। स्वागत समारोह के पश्चात तीर्थ पुरोहितों के द्वारा मां यमुना को मन्दिर के गर्वगृह में स्थापित कर दिया है।

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