सुलगते सवाल : आखिर कौन करेगा गंगोत्री विधानसभा में स्थानीय मुद्दों की बात "ये पब्लिक है सब जानती है"
उत्तरकाशी : गंगोत्री विधानसभा में चुनावी घमाशान शुरू हो चुका है सभी पार्टियां एक दूसरे पर आरोप प्रति आरोप करने में कोई कोर कसर नही छोड़ रही हैं राष्ट्रीय दल कॉंग्रेस और आम आदमी पार्टी ने अपनी अपनी पार्टी के उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी है भाजपा में टिकट की दावेदारी की लंबी लिस्ट है कौन उम्मीदवार होगा इसका फैसला होना बाकी है। आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर गंगोत्री विधानसभा में जहा भाजपा विकास की गंगा बहाने की बात कर सत्ता पर काविज होने की बात कर रही है। वही कांग्रेस अपने पूर्व कार्यकाल में किये विकास कार्यों को लेकर जनता के बीच मे तीसरी बार समर्थन माँग रही है। वही गंगोत्री विधानसभा में दिल्ली मॉडल को लेकर आम आदमी पार्टी सत्ता पाने को लेकर जनता के बीच में विश्वास जगाने में जुटी है।
अधिकतर सभी विपक्षी दल महंगाई व भ्र्ष्टाचार को मुख्य मुद्दा बनाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर अपनी पीठ थपथपा रहे हैं। जबकि विपक्षी पार्टियों के द्वारा स्थानीय मुद्दों की कोई बात नही हो रही है जिसका आम जन मानस से सीधा सरोकार है। बात करे गंगोत्री विधानसभा की तो यहां पर कई मुद्दे आज भी अनछुए है। बात करे भटवाड़ी विकासखण्ड की तो जिसका मुख्यालय ही कई सालों से उजाड़ बना हुआ है तहसील मुख्यालय में न तो तहसील भवन बना हुआ है सालों से भवन बनने की कोरी बात की जा रही है। जिस कारण यहां के परगना मजिस्ट्रेट भी यहां नही बैठते है।आपको बतादे उत्तराखंड में भटवाड़ी एक ऐसी परगना है जहां पर परगना मजिस्ट्रेट का कार्यालय ही नही है। कर्मचारी यहां पर आते है सैर सपाटा कर चल देते है, कांग्रेस सरकार के दौरान भाजपा ने इसको चुनावी मुद्दा बनाया था चुनाव जीतकर ठंडे बस्ते में डाल दिया यह बात किसी से छिपी नही है। पर जनता सब जानती है। आखिर कौन इस और ध्यान देगा। यह क्षेत्र आपदा की दृष्टि से अति संवेदनशील है कई बार दुर्घटनाएं भी घटती रहती है। क्षेत्र में आपदाओं की दृष्टि से अति संवेदनशील देखते हुए पीएचसी भटवाड़ी को उच्चीकरण की लम्बे समय से दरकार है किन्तु इस और किसी का ध्यान नही है। विकासखण्ड भटवाड़ी की ग्राम पंचायत नेताला में ग्रामीणों ने 1992 में नरसिंग ट्रेनिंग सेन्टर खोलने के लिए अपनी उपयोगी जमीन दी थी तथा यहां पर करोड़ो की लागत से ट्रेनिंग सेन्टर भी बना किन्तु आज यह भवन मवेशियों का अड्डा बना हुआ है किसी भी पार्टी ने इसकी सुध लेने की कोशिश नही की है आखिर क्यो सुलगता सवाल है। जबकि गंगोत्री विधानसभा में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल सत्ता में रहकर विकास की गंगा बहाने के दावे करते रहे हैं। क्या यह है गंगोत्री विधानसभा का विकास,गंगोत्री विधानसभा की केलसु पट्टी जो कि जिला मुख्यालय के सबसे नजदीक होने के बावजूद आज भी यहां के ग्रामीण कई मूलभूत समस्याओं जूझ रहे है। अब बात करे जिला मुख्यालय की तो मुख्यालय में कई वर्षों से कूड़े की समस्या जस की तस है। बस अड्डे को लेकर माननीयों ने अपने कार्यकाल में नींव के पत्थर तक रखे थे करोड़ों खर्च होने पर भी आज नींव के पत्थर ही गायब है। तिलोथ पुल निर्माण जिसको जिले की जनता देख रही है कब पूरा होगा पता नही है। कांग्रेस सरकार में जिले में कुछ मॉडल विद्यालय घोषित हुए थे किस तरह के मॉडल है किसी से छुपा नही है। डुंडा विकासखण्ड में बोन गांव में करोड़ो की लागत से इजीनियरिंग विद्यालय बना है जो आज मवेशियों का अड्डा बना हुआ है। ग्रमीण अपनी जमीन देकर ठगा महसूस कर रहे हैं। तथा आम जन मानस की जेब से टैक्स के पैसे का खुलेआम दुरुपयोग होता दिख रहा है। डुंडा विकासखण्ड के धनारी और गंगोत्री विधानसभा के ब्रम्हखाल से लगे क्षेत्र की हालत भी किसी से छुपी नही है इन क्षेत्रों में किंतना विकास हो चुका है। अब ऐसे में गंगोत्री विधानसभा की जनता आनेवाले समय में किस पार्टी को अपना समर्थन देती है फिलहाल यह भविष्य के गर्व में है सबकी टकटकी 2022 विधानसभा चुनाव पर टिकी हुई है सभी दल अपनी अपनी गणित बैठाने में लगे हुए है।
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