गंगोत्री विधानसभा के भटवाड़ी कस्वे के विकास को लेकर सुलगते सवाल बने यक्ष प्रश्न

उत्तरकाशी (राजेश रतूड़ी) : उत्तराखण्ड प्रदेश बनाने की मांग उत्तराखंड की जनता ने इसलिए की थी कि पहाड़ी जिलों और कस्वों का विकास हो सके किन्तु उत्तराखंड को बने हुए दो दशक बीत जाने पर भी यहां के छोटे  छोटे कस्वों की स्थिति आज भी बदहाल है। जिसकी बानगी गंगोत्री विधानसभा में पड़ने वाले तहसील मुख्यालय भटवाड़ी कस्वे को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है।
भटवाड़ी कस्बा जो कभी गुलजार हुआ करता था वर्तमान समय में शासन और प्रशासन की उपेक्षाओं के चलते बदहाली के आंसू बहा रहा है। गंगोत्री विधानसभा में दो दशक में दो बार कांग्रेस और दो बार भाजपा के विधायक यहां से चुनकर गए है। किंतु किसी ने भटवाड़ी कस्वे को बसाने की पहल नही की है। इतना जरूर है हर चुनाव में भटवाड़ी कस्वे के विकास को लेकर नेताओं ने राजनीतिक मुद्दा जरूर बनाया है। भटवाड़ी कस्वे को स्वास्थ्य की दृष्टि से पी0एच0सी0 को सी0एच0सी0 उच्चीकरण की दरकार है क्यो कि यह क्षेत्र आपदाओं की दृष्टि से अति संवेदनशील और गनोत्री धाम यात्रा सीजन का मुख्य पड़ाव होने के बावजूद भी सी0एच0सी0 के उच्चीकरण  को लेकर कोई पहल नही हुई है। वर्ष 2010 की आपदा में भटवाड़ी कस्वे का तहसील भवन आपदा की भेंट चढ़ गया किन्तु आजतक तहसील भवन नही बन पाया है आज भी जर्जर भवन में तहसील कार्यालय चल रहा है। भटवाड़ी में भू-धसाव के चलते 50 से 55 परिवार बेघर हुए थे आजतक प्रभावितों को पुनतेर्वास के लिए जमीन आवंटित नही हो पाई है। उत्तराखण्ड प्रदेश में भटवाड़ी कस्वे की मात्र एक ऐसी परगना है जो नाम से परगना तो है किंतु यहां पर परगना मजिस्ट्रेट का कार्यालय ही नही है। जो यह बताने के लिए काफी है कि इन 20 सालों में भटवाड़ी कस्वे का किंतना विकास हुआ है। गंगोत्री विधानसभा में पड़ने वाले भटवाड़ी कस्वे के विकास  को लेकर सुलगते सवाल आज भी यक्ष प्रश्न बनकर खड़े हैं।

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