भटवाड़ी गांव के प्रसिद्ध लेखक,आचार्य,कर्मकांड वेता प0 शिव स्वरूप "याज्ञिक" अब दुनिया में नही रहे,इनका अंतिम संस्कार 17 फरबरी को पैतृक घाट भटवाड़ी त्रिवेणी पर होगा
राजेश रतूड़ी
उत्तरकाशी : भटवाड़ी गाँव के पसिद्ध लेखक,आचार्य,कर्मकांड
वेता प0 शिव स्वरुप "याज्ञिक"अब हमारे बीच इस दुनिया में नही रहे इनका आज सुबह लगभग 8 बजे देहरादून के निजी अस्पताल में लंबी बीमारी के चलते देहांत हो गया है। इनके देहांत होने पर इनके अनुयाइयों में शोक की लहर व्याप्त है। इनके प्राथिक शरीर को इनके पैतृक गांव भटवाड़ी लाया जा रहा है।
आपको बतादे भटवाड़ी गांव में जन्मे प0 शिव स्वरूप इनके पिता दत्तक पुत्र के रूप में भटवाड़ी आये थे इनकी प्राथमिक शिक्षा प्राइमरी पाठशाला भटवाड़ी में हुई इसके बाद 12वी तक जी.आई.सी भटवाड़ी में पड़े इनके पिता की मृत्यु के पश्चात इनके ऊपर घर की सम्पूर्ण जिम्मेदारी आगयी थी। जिस कारण 12 वी के बाद इन्होंने घर मे ही स्वाध्याय कर कर्मकांड से सम्वन्धित 24 किताबों की भाषा टीका लिखकर कर्मकांड क्षेत्र में अपना कृतिमान स्थापित किया है। इनकी पुस्तको में सम्पूर्ण पूजन रहस्यम,हवन रहस्यम, कर्मकांड रहयस्य, आदि 24 पुस्तकों का सरल संकलन कर ब्रह्ममण वृति करने वाले पण्डितों के लिए पूजन कार्य करना आसान कर दिया था। इनकी कर्मकांड सम्वन्धी सभी पुस्तकें उत्तराखंड ही नही बल्कि पूरे भारत में लोगों ने खूब पसंद और चर्चित है। इनके देहांत को लेखन के क्षेत्र में एक अपूरणीय क्षति मानी जा रही है। पत्रकारिता से जुड़े "गंगोत्री मेल" के संपादक राजेश रतूड़ी,कुशला रतूड़ी, विनोद रतूड़ी ने इनके आकस्मिक देहात को लेखन के क्षेत्र में अपूरणीय क्षति बताया। इनका अंतिम संस्कार इनके पुत्र कपिल नौटियाल के द्वारा भटवाड़ी के प्रसिद्ध त्रिवेणी संगम घाट पर 17 फरबरी को किया जाएगा। इनके पुत्र के अलावा पत्नी सुलोचना
और पुत्री उमा है।
प0 शिव स्वरूप " याज्ञिक" अत्यधिक सरल स्वभाव और मृदुभाषी व्यक्तित्व के धनी थे इसी कारण इनको लोग बहुत पसंद करते रहे है। इन्होंने उत्तरकाशी जिले में ही नही बल्कि पूरे उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, दिल्ली ,हरियाणा कई स्थानों में कथाओं में कथा आचार्य का कार्य सम्पादित किया था।
ओम शांति ओम शांति विद्युत पंडित जी का हमारे लिए अपूरणीय क्षति है विशेषकर के कर्मकांड के क्षेत्र में जो स्थान रिक्त पड़ गया है उसकी भरपाई करना बहुत ही मुश्किल है मैं श्री चरणों में अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं और भगवान से प्रार्थना करता हूं कि पंडित जी की आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दे ओम शांति ओम शांति
जवाब देंहटाएंOm Shanti Yagik ji.💐💐💐
जवाब देंहटाएंबहुत ही दुखद,,भगवान पुण्य आत्मा को वैकुंठ प्रदान करें,,🙏🙏🙏
जवाब देंहटाएंअत्यंत दुखद
जवाब देंहटाएंपरमात्मा उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे व परिजनों को इस दु:ख की घड़ी में , दुःख सहने की शक्ति प्रदान करे
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