हैप्पी बर्थडे टू यू "उत्तरकाशी" ,62 वर्ष का हुआ उत्तरकाशी जिला
राजेश रतूड़ी
प्राकृतिक सुंदरता से लबरेज उत्तरकाशी जिला अपने में कई आध्यात्मिक व धार्मिक मान्यताओं को को समेठे हुए है। मंदिरों और मठों से जकड़ा उत्तरकाशी जिला कई पौराणिक इतिहास क साक्षी है। उत्तरकाशी जिला कई उतार चढ़ाव के बाद बसा और उजड़ा है। वर्ष 1978 की बाढ़ ने जहा उत्तरकाशी को उजाड़ा था विकास की गति भी बाढ़ के ही बाद ही पकड़ी है,1991 के भूकम्प,2012-13 की आपदा भी इसी शहर ने झेली है। इतिहास साक्षी है कि उत्तरकाशी जिले में बारबार आपदाएं आती रही उजड़ता रहा और दोगुनी रफ्तार से बसता भी रहा। अस्सी और बरुणा के बीच में बसे होने के कारण इस शहर को उत्तर की काशी कहा जाता है। शहर में यू तो कई मन्दिर है परंतु शहर के बीच में स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर व उससे लगा हुआ शक्ति मन्दिर देवासुर संग्राम के साक्षी है। तथा गंगा नदी पार कर जोशियाड़ा में कालेश्वर मन्दिर आज भी अपनी धार्मिक मान्यताओं के लिए देश ही नही बल्कि विदेश में भी जाना जाते है। सीमांत जनपद और गंगा यमुना की उदगम स्थली होने के कारण उत्तराखण्ड के दो धाम इसी जिले में विद्यमान है। जिनके दर्शनों के लिए हजारों की संख्या में लोग यहां पहुँचते है। उत्तरकाशी जिले में मन को हरने वाले कई ताल और बुग्याल है जिनको विश्व के पर्यटन मानचित्र में स्थान मिला है। जहा पहुँचकर अलौकिक शांति की अनुभूति प्राप्त की जा सकती है। आज उत्तरकाशी जिला 62 वर्ष का हो गया है इन 62 वर्षों में जिले ने उत्तर चढ़ाव के साथ साथ विकास भी भी उसी रफ्तार से हुआ है। जिससे पूरे जिले के लोग आज कह रहे हैं हैप्पी बर्थडे टू यू उत्तरकाशी।
उत्तरकाशी : उत्तरकाशी जिले की स्थापना 24 फरबरी 1960 को हुई थी इससे पूर्व यह जिला टिहरी रियासत से टिहरी जिले की रवाई परगना में हुआ करता था। अलग जिला बनने के बाद इसकी अपनी एक अलग पहचान बनी है। जिसकी ख्याति देश मे ही नही अपितु विदेश में भी विख्यात है।
प्राकृतिक सुंदरता से लबरेज उत्तरकाशी जिला अपने में कई आध्यात्मिक व धार्मिक मान्यताओं को को समेठे हुए है। मंदिरों और मठों से जकड़ा उत्तरकाशी जिला कई पौराणिक इतिहास क साक्षी है। उत्तरकाशी जिला कई उतार चढ़ाव के बाद बसा और उजड़ा है। वर्ष 1978 की बाढ़ ने जहा उत्तरकाशी को उजाड़ा था विकास की गति भी बाढ़ के ही बाद ही पकड़ी है,1991 के भूकम्प,2012-13 की आपदा भी इसी शहर ने झेली है। इतिहास साक्षी है कि उत्तरकाशी जिले में बारबार आपदाएं आती रही उजड़ता रहा और दोगुनी रफ्तार से बसता भी रहा। अस्सी और बरुणा के बीच में बसे होने के कारण इस शहर को उत्तर की काशी कहा जाता है। शहर में यू तो कई मन्दिर है परंतु शहर के बीच में स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर व उससे लगा हुआ शक्ति मन्दिर देवासुर संग्राम के साक्षी है। तथा गंगा नदी पार कर जोशियाड़ा में कालेश्वर मन्दिर आज भी अपनी धार्मिक मान्यताओं के लिए देश ही नही बल्कि विदेश में भी जाना जाते है। सीमांत जनपद और गंगा यमुना की उदगम स्थली होने के कारण उत्तराखण्ड के दो धाम इसी जिले में विद्यमान है। जिनके दर्शनों के लिए हजारों की संख्या में लोग यहां पहुँचते है। उत्तरकाशी जिले में मन को हरने वाले कई ताल और बुग्याल है जिनको विश्व के पर्यटन मानचित्र में स्थान मिला है। जहा पहुँचकर अलौकिक शांति की अनुभूति प्राप्त की जा सकती है। आज उत्तरकाशी जिला 62 वर्ष का हो गया है इन 62 वर्षों में जिले ने उत्तर चढ़ाव के साथ साथ विकास भी भी उसी रफ्तार से हुआ है। जिससे पूरे जिले के लोग आज कह रहे हैं हैप्पी बर्थडे टू यू उत्तरकाशी।
62 साल का हो गया है उत्तरकाशी
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