पंचकोशी यात्रा में उमड़ी पदयात्रियों की भीड़,माता नांगणी की यात्रा भी होती है वारुणी पर्व पर, सैकड़ो की संख्या में दर्शनों को पहुचे भक्त


राजेश रतूड़ी
उत्तरकाशी। : उत्ततरकाशी  अस्सी गंगा,वरुणा और गंगा नदी के बीच में घिरे वरुणावत पर्वत की पैदल परिक्रमा वाली पंचकोसी वारुणी यात्रा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी है। यात्रा में शामिल दर्शनार्थियों ने  पर्वत पर स्थित आसपास लगे गांवों में प्राचीन मंदिरों में पूजा-अर्चना कर पूण्य कमाया। यात्रा मार्ग के गांवों में ग्रामीणों द्वारा पैदल चलने वाले यात्रियों  के स्वागत सत्कार एवं फलाहार की व्यवस्था की गई है।
आपको बता दें कि हर वर्ष चैत्र महीने की कृष्ण त्रयोदशी के दिन वारुणी यात्रा का आयोजन किया जाता है। पुराणों के अनुसार इस यात्रा को करने से सभी तीर्थों की यात्रा का पुण्य मिलता है। इस यात्रा के प्रति धार्मिक आस्था रखने वाले पदयात्री हर साल बड़ी संख्या में पाँच कोश की पदयात्रा में शामिल होते हैं।  
बुधबार को सुबह से ही पौराणिक मणिकर्णिका और बड़ेथी स्थित वरुणा और गंगा भागीरथी के संगम पर आस्था की डुबकी लगाकर श्रद्धालुओं के जत्थे वारुणी यात्रा पर बढ़ने लगे। बड़ेथी में वरुणेश्वर महादेव मंदिर में दर्शन व जलाभिषेक के साथ आगे बढ़े श्रद्धालुओं ने बसूंगा में अखंडेश्वर, साल्ड में जगरनाथ एवं अष्टभुजा दुर्गा, ज्ञाणजा में ज्ञानेश्वर एवं व्यास कुंड, वरुणावत शीर्ष पर शिखरेश्वर एवं विमलेश्वर महादेव, संग्राली में कंडार देवता एवं पाटा गांव में नर्वदेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक एवं पूजा-अर्चना करते हुए वहां से पदयात्री गंगोरी स्थित असी गंगा एवं गंगा के संगम पर पहुंचे। वहां पर स्नान के बाद उन्होंने उत्तरकाशी मुख्यालय में स्थित विभिन्न मंदिरों में पूजा-अर्चना के साथ काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचकर यात्रा संपन्न मानी जाती है।

यात्रा का धार्मिक महत्व

स्कंद पुराण के केदारखंड के अनुसार वरुणावत पर्वत की पैदल परिक्रमा वाली वारुणी यात्रा सच्चे मन से करने पर श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं तथा हजारों तीर्थों की यात्रा का पुण्य लाभ मिलता है ऐसा विद्ववान बताते है।
 वारुणी पर्व पर होती है माता नांगणी की यात्रा
उत्तरकाशी जिले में पंचकोशी यात्रा के अलावा आज ही के दिन नांगणी देवी यात्रा भी की जाती है जो उत्तरकाशी जनपद के धनारी पट्टी के बगसारी गांव के शीर्ष बालखिला पर्वत पर पैदल खड़ी चढ़ाई चढ़कर की जाती है। सुबह से ही बालखिला पर्वत नागणी ठांग में माँ नागणी देवी के दर्शनों के लिए सैकड़ों की संख्या उमड़े श्रद्धालु 
आपको बतादे उत्तरकाशी जिले के धनारी पट्टी के बगसारी गाँव के शीर्ष पर माँ नागणी देवी के मंदिर में आज वारुणी  पर्व के अवसर पर सैकड़ों की संख्या में भक्तों, श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पुण्य कमाया । समुद्र तल से 8707 फ़ीट की ऊँचाई पर स्थित हिमालय के दर्शन के साथ साथ माँ नागणी देवी के दर्शन होते है। हर वर्ष वारुणी पर्व के समय यात्री माता के दर्शनों के लिए पैदल खड़ी चढ़ाई चढ़कर यहां पहुचते है।। माता नांगणी चिलमुड गांव, ढुंगाल गांव, बगसारी, फोल्ड, चकोंन आदि गांवों की कुल देवी है। स्थानीय युवाओ के द्वारा दर्शनार्थियों  के  लिये जलपान, फलाहार की व्यवस्था की जाती है। माता के भक्त नांगणी माता की जयकारों के साथ इस यात्रा को पूरी करते है। मान्यता है कि जो माता का भक्त इस यात्रा को करता है उसे मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है

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