वनाग्नि की घटनाओं को रोकने को लेकर मुख्य वन सरक्षक निशांत वर्मा उत्तरकाशी जिले के तीन दिवसीय दौरे पर,

राजेश रतूडी
उत्तरकाशी : मुख्य वन सरक्षक निशांत वर्मा ने जिले में वनाग्नि की घटनाओं देखते हुए अपने तीन दिवसीय उत्तरकाशी दौरे के दौरान जिले की विभिन्न वन रेंजों व कू-स्टेशनों का स्थलीय निरीक्षण कर जिले में वनाग्नि के कारणों को खोजने का प्रयास किया तथा वन विभाग के अधिकारियों को वनाग्नि को रोकने को लेकर आवश्यक दिशा निर्देश दिए।
मुख्य वन सरक्षक ने धरासू, टकनोर,मुखेम,बड़ाहाट व डुंडा रेंज के कू-स्टेशनों का स्थलीय निरीक्षण कर वन विभाग के अधिकारियों को दिशा निर्देश देते हुए कहा कि  वन विभाग के सभी कर्मचारी नियमित रूप से फायर ड्रिल करते रहे,जंगल को जाने वाले रास्तो व जंगल के बीच पड़े पिरूल की सफाई नियमित रूप से करते रहे,कू-स्टेशनों के अंतर्गत वनाग्नि को लेकर जागरूकता अभियान चलाते रहे तथा वन क्षेत्रों से लगे खेतों आढा फुकान हेतु सतर्कता बरती जाए। मुख्य वन सरक्षक ने जिले की सभी रेंजों के कू-स्टेशनों का निरीक्षण किया और उत्तरकाशी से लगे एन0आई0एम0 के पाश हुई वनाग्नि की घटना से प्रभावित क्षेत्र का दौरा भी किया व निकट भविष्य में नजदीकी ग्राम प्रधान व वन सरपंचों से वनाग्नि नियंत्रण में वन विभाग के सहयोग की अपील की है।
मुख्य वन सरक्षक ने धनारी के चकोंन में स्थित पिरूल पावर जनरेशन प्लांट का निरीक्षण कर वन कर्मियों को निर्देशित कर कहा कि वनों से अधिक से अधिक पिरूल एकत्रित करे ताकि विजली उत्पादन के साथ साथ वनों में लगने वाली आग को रोका जा सके उन्होंने पिरूल एकत्रित करना  प्लांट से जुड़े स्वयं सहायता समूहों के लिए रोजगार सृजन का महत्वपूर्ण जरिया बताया।
लौंगिक प्रभाग के निरीक्षण के दौरान उन्होंने उत्तरकाशी स्थित केदार घाट एवं फुटकर टॉल का निरीक्षण कर लोगों की मांग के अनुरूप जलौनी प्रकाष्ठ उप्लवद करवाने के निर्देश दिए। 

निरीक्षण के दौरान उनके साथ  प्रभागीय वनाधिकारी पुनीत तोमर,डीएलएम हेतराम,वन क्षेत्राधिकारी रविन्द्र पुंडीर,प्रदीप बिष्ट,संजय कुमार,पूजा चौहान के अलावा वनकर्मी मौजूद रहे।

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