सरकारी व गैर सरकारी संगठनों के गंगा बचाव के दावे केवल बैठकों तक सीमित

राजेश रतूड़ी
उत्तरकाशी : गंगा नदी के बचाव को लेकर सरकार, प्रशासन तथा गैर सरकारी संगठनों के अपने अपने दावे है किंतु धरातल पर सब उसका उल्टा नजारा है जिसको उत्तरकाशी जिले के गंगा तटों की तस्बीरों में साफ देखा जा सकता है।

 उत्तरकाशी में स्वच्छता को लेकर जिले की नगरपालिका फेल है जिसको गंगा नदी के मुहाने पर लगे कूड़े के पहाड़ को देकर समझा जा सकता है।  इससे गंगा नदी को बचाने के दावे करने वाले सरकारी व गैर सरकारी संगठनों के दावों में कितनी सच्चाई को भी समझा जा सकता है कि गंगा को बचाने को लेकर कितने चिंतित है।

इतना ही नही गंगा तटों के किनारे खुले सीबर के पानी को बहते व गंदगी को खुलेआम देखे जाने के बावजूद कोई कुछ नही कर पा रहा हैं। सरकारी अधिकारियों के पास गंगा को बचाने को लेकर बड़े बड़े प्लान तो है किंतु सभी कागजो में है कागजो से धरातल पर नही उतर पा रहे हैं। धरातल पर कब उतरेंगे ये किसी को पता नही है। वही गंगा स्वच्छता को लेकर गैर सरकारी संगठनों को भी किसी अखबार या सोशल मीडिया पर चन्द तस्बीरों में सफाई करते देखा जा सकता हैं, गंगा तटों के किनारो पर आज भी गन्दगी के अंबार लगे है। अब प्रशन्न यह उठता है कि आखिर कौन लोग है जो गंगा नदी के तटों पर गन्दगी डालते है।
पालिका और जिला प्रशासन इन पर कोई कार्यवाही क्यो नही करता जबकि अब तो शहर के चप्पे चप्पे में सीसी टीबी कैमरे लगे है। बड़ा सवाल है। जिसका जवाब या तो पालिका के आलाधिकारीयों के पास है या जिला प्रशासन के पास क्या गन्दगी फैलाने वालों पर कभी जिला प्रशासन व पालिका नकेल कस पायेगी या फिर गंगा बचाव केवल बैठकों में प्लान बनाने तक ही सिमित रहेगा।

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