भास्करेश्वर महादेव मंदिर में श्रावण मास में एक महीने तक चलने वाले शिव महापुराण का पूर्णाहुति के साथ सम्पन्न,समेश्वर देवता की मौजूदगी में दी गयी अंतिम आहुति

राजेश रतूड़ी
उत्तरकाशी/भटवाड़ी : तहसील मुख्यालय भटवाड़ी के प्रसिद्ध भास्करेश्वर महादेव मन्दिर में एक महीने तक चलने वाले शिव महापुराण  पूर्णाहुति के साथ सम्पन्न हो गया है इष्ट समेश्वर देवता की मौजूदगी  में हुआ सभी कार्यक्रम सम्पन्न। स्थानीय पुजारियों के द्वारा ही अपनी अपनी बारी के अनुसार कथा की जाती है। इस वर्ष प0 सुमित नौटियाल ने 1 माह तक भगवान शिव की विभिन्न कथाओ का अमृत पान कराया।

मन्दिर की महत्ता और इससे जुड़ी कथा
ईदम् वे भास्करम् क्षेत्रम् शिवस्थान स्मृतम परम्। नाम्ना तत्र महादेव विप्रस्य भास्करेस्वरम्।।

भटवाड़ी जिसका नाम कालांतर में "भाष्कर प्रयाग" हुआ करता था। स्कंद पुराण की कथाओं के अनुसार यहां पर (भटवाड़ी में) भगवान भास्कर यानी सूर्यदेव ने ब्राह्मण के वेश में भगवान शिव की तपस्या की थी। कथाओं में कहा जाता है कि एकबार भगवान शिव, सूर्य भगवान से क्रोधित हुए थे, और त्रिसूल लेकर मारने को उनके पीछे दौड़े त्रिसूल से बचने के लिए भागते भागते सूर्य भगवान एक जल कुण्ड में छिप गए। तथा जल कुण्ड में ही ब्राह्मण के वेश में घोर तपस्या की उनकी घोर तपस्या करने पर शिव प्रशन्न हुए और वरदान दिया कि इस स्थान में मुझे तुमारे नाम "भास्करेश्वर महादेव" से जानेंगे तथा जिस जल कुण्ड में तपस्या की यह सूर्य कुण्ड के नाम से विखयात होगा। इसलिए यहां पर स्थित शिवलिंग को भास्करेश्वर महादेव के नाम से जाना जाने लगा। व इस स्थान पर तीन नदियों गंगा,नवला व शंखधारा के संगम से प्रयाग बनने के कारण "भाष्कर प्रयाग" नाम से जाना जाने लगा कालांतर में इस स्थान (भटवाड़ी में) भाट जाती की प्रमुखता होने के कारण धीरे धीरे अपभ्रंस होकर भटवाड़ी हो गया है

प0 प्रभात शास्त्री बताते है कि काल सर्प दोष मुक्ति,निसन्तान दम्पति सन्तति प्राप्ति के लिए मन्दिर में जप,तप,व्रत व दान करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। श्रावण मास में यहां की महत्ता और भी बढ़ जाती है।

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