महिलाओं का उत्पीड़न रोकना पहली प्राथमिकता ,महिलाओं के साथ हर मोर्चे पर खड़ा है उत्तराखंड राज्य महिला आयोग : कुसुम कंडवाल

राजेश रतूड़ी
उत्तरकाशी : राज्य महिला आयोग के द्वारा जिला सभागार उत्तरकाशी में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग को लेकर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जिसमें जिले के विभिन्न विभागों के अधिकारियों कर्मचारियों व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रतिभाग किया।
कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग के बारे में बताते हुए कहा है कि आयोग का मुख्य उद्देश्य बंधुआ मजदूरी,देह ब्यापार,बाल श्रम पर अंकुश लगाना है। जिसके लिए आयोग उत्तराखंड के सभी जिलों में कार्यशाला कर जन जागरूकता फैलाने का काम कर रहा है। आयोग की अध्यक्ष ने बैठक में मौजूद अधिकारियों, कर्मचारियों व सामाजिक कार्यकर्ताओं के सुझाव लिए।
कार्यशाला में मानव तस्करी पर काम कर रहे एक्टिविस्ट ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि मानव तस्करी बाल श्रम,गोद लेने के नाम पर,शादी के नाम पर बधू तस्करी,ब्यवसाहिक योन उत्पीड़न,मानव अंगों के लिए मानव तस्करी,सोशल मीडिया के माध्यम से हो रही है। उन्होंने बताया कि मानव तस्करी एक संगठित अपराध है जिसकी चेन को समाज के सभी वर्ग एकजुट होकर ही तोड़ सकते है। जिसके लिए हर गाँव मे ग्राम स्तर पर कमेटी बनाकर निगरानी की जा सकती है।

प्रेसवार्ता

महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने प्रेसवार्ता कर पत्रकारों के समक्ष उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में महिला अपराध की घटनाओं को साझा किया। उन्होंने मीडिया कर्मियों को बताया कि  महिलाओं एवं किशोरियों द्वारा आयोग में दर्ज मामलों के सापेक्ष निस्तारण का ब्यौरा मीडिया को दिया। उन्होंने कहा कि राज्य महिला आयोग के पास 1 अप्रैल 2022 से वर्तमान तक कुल 1309 मामले दर्ज हुए। जिसके सापेक्ष 607 मामलों का निस्तारण किया गया तथा शेष 702 मामलों में कार्यवाही गतिमान है। पत्रकारों ने भी उत्तराखंड में महिलाओं के साथ हो रहे अपराधों की रोकथाम को लेकर आयोग की अध्यक्ष को सुझाव दिए।

महिला आयोग में कुल दर्ज मामले

दहेज उत्पीड़न के 142 केस दर्ज हुए जिसमें 67 मामलों का निस्तारण किया गया,शेष पर कार्यवाही गतिमान है। इसी तरह दहेज हत्या का 1 मामला पंजीकृत हुआ जिसका निस्तारण किया गया। हत्या/आत्म हत्या के 11 मामले आये जिसमें 4 का निस्तारण किया गया। बलात्कार के 16 मामलों के सापेक्ष 6 का निस्तारण किया गया। शारारिक उत्पीड़न के 8 मामलों के सापेक्ष 2 का निस्तारण किया गया। मानसिक उत्पीड़न के 283 के सापेक्ष 134 एवं घरेलू हिंसा के 233 के सापेक्ष 106,भरण पोषण के 24 के सापेक्ष 11,सम्पति विवाद के 31 के सापेक्ष 10,देह व्यापार  के 2 के सापेक्ष 1 एवं यौन उत्पीड़न के 12 के सापेक्ष 4 का निस्तारण किया गया। इसी तरह जानमाल सुरक्षा के 337,गुमशुदगी के 6,पेंशन 1,झूठे आरोप 2,अवैध सम्बंध 20,आर्थिक उत्पीड़न 17,धोखाधड़ी के 17,अश्लील हरकतें/छेड़खानी के 37 एवं अन्य 36 मामले दर्ज हुए। जिसमें अधिकांश का निस्तारण किया गया।

कार्यशाला में डीएम अभिषेक रुहेला,एसपी अपर्ण यदुवंशी, जिला पंचायत राज अधिकारी सीपी सुयाल,जिला कार्यक्रम अधिकारी यशोदा बिष्ट,जिला समाज कल्याण अधिकारी सुधीर जोशी,समाजसेवी कल्पना ठाकुर सहित अन्य अधिकारी,कर्मचारी मौजूद रहे।

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