वर्ष 2013 से वित्तीय स्वीकृति के लिए भटवाड़ी तहसील भवन निर्माण की फाइल सचिवालय के ठंडे बस्ते में

राजेश रतूड़ी
उत्तरकाशी :  वर्ष  2010 में क्षतिग्र्रस्त हुए तहसील भवन का निर्माण आजतक नही हो पाया है।तब से लेकर आजतक भटवाड़ी क्षेत्र के लोग तहसील भवन बनने की बाट जोह रहे है टूटे फूटे भवन में संचालित हो रहा है तहसील कार्यालय। तहसील भवन निर्माण को लेकर क्षेत्र के लोग लंबे समय से माँग कर रहे हैं शासन प्रशासन की अनदेखी के चलते धीरे धीरे अब लोगो का सब्र जवाब दे रहा है क्षेत्र में अंदर ही अंदर बड़े आंदोलन की सुगबुगाहट चल रही है।
        वर्ष 2010 की आपदा के कारण भटवाड़ी तहसील भवन भूधसाव की जद में आ गया था जिस कारण तहसील भवन को एनटीपीसी के भवन में शिफ्ट कर दिया गया था तब से आजतक यही पर तहसील कार्यालय संचालित हो रहा है। जबकि वर्ष 2013 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ने तहसील भवन बनवाने को लेकर घोषणा की थी  भवन बनाने की स्वीकृति भी मिल गयी थी डीपीआर बनाने के लिए 13 लाख रुपये की धनराशि भी टोकन मनी के तौर पर रिलीज होकर खर्च भी चुकी है। हर चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के विकास पुरुष गंगोत्री विधानसभा में विकास की गंगा बहाने की बात करते रहे  सभी कोरे आश्वासन देकर आजतक जनता को गुमराह करते रहे हैं। जबकि आज स्थिति यह है कि आज भी तहसील भवन वित्तीय स्वीकृति के लिए शासन में लंबे समय से ठंडे बस्ते में पड़ा है। लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों की माने तो उनकी दलील है कि वर्ष 2013 में तहसील भवन के लिए 3 करोड़ स्वीकृत हुए थे कारण जो भी रहे हो मामला लंबे शमत से ठंडे बस्ते में रहने के कारण वर्ष 2017 में पुनः विभाग ने रेट रिवाइज के लिए भेजा था लम्बी 9प्रक्रिया के बाद जैसे तैसे तहसील भवन की फाइल शासन में पहुँची आजतक वित्तीय स्वीकृति के लिए शासन में अटकी हुई है। अब लोगो की टकटकी वर्तमान विधायक सुरेश चौहान पर लगी हुई है देखना यह होगा कि वर्तमान विधायक तहसील भवन को वित्तीय स्वीकृति दिला पाते है या पूर्व के विकास पुरुषों की भांति भटवाड़ी क्षेत्र की जनता को आश्वासन का झुनझुना थमाते है देखने वाली बात होगी।
        भटवाड़ी मुख्यालय में तहसील भवन न होने के कारण यहां  उपजिलाधिकारी की कोर्ट नही लग्नती है और न ही उनका कोई कार्यालय है केवल नाम की परगना है। भटवाड़ी परगना उत्तरकाण्ड की एक मात्र ऐसी परगना है जिसकी कोर्ट जिला मुख्यालय में ही लगती है। तहसील मुख्यालय में उपजिलाधिकारी का कार्यालय न होने के कारण भटवाड़ी कस्वे की प्रशासनिक व्यवस्था चरमरा रखी है। एसडीएम को भटवाड़ी परगना में बैठने को लेकर ग्रामीण आंदोलन भी कर चुके हैं ग्रामीणों के हाथों शासन औऱ प्रशासन के द्वारा केवल कोरे आश्वासन के अलावा कुछ हाथ नही लगा है। वर्तमान में भटवाड़ी कस्वे की प्रशासनिक ब्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है। जिस कारण भटवाड़ी क्षेत्र में ज्वलन्त मुद्दे को लेकर आंदोलन की सुगबुगाहट हो रही है।

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