साध्वी प्रमानंदा सरस्वती द्वारा रचित "माँ गंगा की जीवनदायिनी संस्कृति" पुस्तक का विमोचन
राजेश रतूड़ी
उत्तरकाशी : वृहस्पतिवार को तपस्यालयं आश्रम, नेताला में "माँ गंगा की जीवनदायिनी संस्कृति पुस्तक" का विमोचन हुआ।पुस्तक विमोचन समारोह नेताला ग्राम के इष्ट देवता वासुकी नाग की सानिध्य में संपन हुआ। समारोह में साधु समाज , ब्राह्मण समाज से जुड़े पंडित, प्रधान, क्षेत्र पंचायत, जिला पंचायत, महिला मंगल दल एवं युवक मंगल दल के युवाओं ने प्रतिभाग किया। पुस्तक का लेखन स्वामिनी प्रमानंदा सरस्वती (अम्माजी) ने किया है।
पुस्तक विमोचन के मुख्य अतिथि दंडी स्वामी हरिहर आश्रम ने अपने संबोधन में कहा कि अम्माजी ने पंच प्रयाग के विकास का सकल्प लिया है यह मेरे विचार में पहले नही आया वरना हम मिलकर इस पर काम करते। आप सब लोगो से निवेदन है कि इस कार्य में अम्मा की पूर्ण सहयोग करें।
स्वामी हरि ब्रहमेंद्रानंद आचार्य ब्रहमविद्या पीठ ने अपने स्मवोधन में अम्मा जी को गंगा घाटी के आध्यात्मिक सरक्षण के लिए धन्यवाद दिया। । स्वामी सचिदानंद अध्यक्ष, साधू समाज ने हिंदी पुस्तक का विमोचन किया व अपने वक्तव्य में कहा हम सब धारी निवासी इस पुस्तक का अध्ययन करें व यहां कि चरा के विकता का संकल्प ले पंच प्रयाग को जागृत करना जो वेदों और पुराणों में वर्णित है। स्वामी प्रेमानन्द सरस्वती, अध्यक्ष शिवानन्द आश्रम गणेशपुर, के प्रतिनिधि स्वामी आत्मानन्द ने अंग्रेजी पुस्तक का विमोचन किया व अम्माजी का एक साध्वी के रूप में गंगा घाटी के विकास में अविस्मरणीय योगदान बताया
अम्माजी (स्वामिनी प्रमानंदा) ने पुस्तक विमोचन के अवसर पर आए सभी अतिथियों को धन्यवाद दिया है और कहा कि मेने वासुकी नाग देवता की प्रेरणा से माँ गंगा की पावन व महान संस्कृति पर प्रकाश डाला है। क्षेत्र की संस्कृति व पर्यावरण का सरंक्षण आने वाली पीड़ियो के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि मैंने अपनी पुस्तक में गंगा घाटी के पंच प्रयाग की महता को उजागर करते हुए गंगा की सहायक सदियाँ और आम जन मानस के बीच गुप्त पंच प्रयाग को पुनः प्रकाशित करने का कोशिश की है। जिनका उल्लेख वेदों और पुराणों में विद्यमान है। मेरा उद्देश्य है कि पंच प्रयागों के जागृत होने से घाटी के अध्यात्मिक कल्याण व बुनयादी विकास हो। कार्यक्रम में कई वक्ताओं ने अम्मा जी द्वारा रचित पुस्तक को लेकर अपने अपने विचार तखे।
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