देवलसारी गाँव निवासी लता नौटियाल बनी है स्वरोजगार व उद्यमिता के क्षेत्र में महिलाओं के लिए मिशाल

राजेश रतूड़ी
उत्तरकाशी :  अगर किसी के अंदर कर गुजरने की चाह हो तो मंजिलों को उसके आगे झुकना पड़ता है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है जनपद उत्तरकाशी के देवलसारी गाँव निवासी लता नौटियाल ने  अपने छोटे से काम से पहचान बनाकर उद्यमिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण पहचान बनाने में कामयाब हुई है।
        लता नौटियाल ने अपनी पहचान “पीसियू लूण“  (घरेलू पीसा हुआ नमक) जैसे उत्पाद से शुरुआत की है। वर्ष 2009 में अपने पति के साथ देहरादून आई यहां पर उन्होंने अपना कुछ अलग करके दिखाने की ठान ली।
                उन्होंने अपने पति नरेश नौटियाल से बात कर गांव की अन्य महिलाओं को साथ लेकर घर पर ही स्वरोजगार की शुरुआत कर दी। पति नरेश नौटियाल भी पहाड़ी उत्पादों को बाजार का रूप दे रहे थे। दोनो ने मिलकर तय किया कि लता घर पर शील में नमक पीसकर जिसमे पहाड़ी हरा धनिया, पोदिना, जीरा और अन्य जड़ी बूटी मिलाकर “पहाड़ी पीसियु लूण, नाल बड़ी“ आदि उत्पाद बनाएगी और नरेश इन उत्पादों को बाजार में उपलब्ध करवाएगा,  धीरे धीरे उनका कारोबार बढ़ता गया और उनके उत्पादों की बाजार में भी मांग बढ़ने लगी।। जहां जहां नरेश पहाड़ी उत्पादों का स्टाल लगाता था वहां वहां ‘नाल बड़ी‘ और पहाड़ी पीसियु लूण की मांग तेज होने लगी। इस कार्य को विस्तार देने के लिए लता ने अपने गांव व आसपास के गांव की अन्य महिलाओं से संपर्क साधा और वे सभी मिलकर उनके इस काम मे सहयोग दे देने लगी महिलाएं पहाड़ी पिसियु लूण और नाल बड़ी बनाकर उन्हे देती और लता इन उत्पादों को  बाजार में बेचती रही। इससे लता तो मजबूत हुई ही अन्य महिलाओं को घर बैठे ही रोजगार मिल गया। और धीरे धीरे दोनों दम्पती न मिलकर “रुद्रा एग्रो स्वायत सहकारिता“ संस्था बनायी। इस सहकारिता संस्था के साथ अपने गांव और आसपास के अन्य गांव की महिला स्वयं सहायता समूह को सदस्य बनाना शुरू किया। इस तरह  वर्तमान समय मे उनकी संस्था के सा
 साथ  3000 महिला मिलकर काम कर स्वरोजगार कर रही है। जिनके उत्पाद रुद्रा एग्रो स्वायत सहकारिता खरीदता है और  देशभर में इन उत्पादों को बेचते है।
अब हालात यह है कि सरकारी एवम गैर सरकारी आयोजनों में स्टाल अथवा प्रदर्शनी में लगाने पर महिलाओं द्वारा निर्मित ब्रांड “पहाड़ी पिसियू लूण व नाल बड़ी“ भारी मात्रा में बिक रहा है। लता नौटियाल ने बताया कि उनके साथ जुड़ी हर महिला प्रति माह पांच हजार से सात हजार रूपए घर बैठे कमाती है। वाह यह भी बताती है कि इस काम को महिलाएं अपने लिए तब तब करती है जब जब उनके पास समय बचता है। लता नौटियाल ने यमुनाघाटी में महिला उधमिता को लेकर एक मिशाल कायम की है। उन्हे देखते देखते अन्य युवतियां भी अब इस तरह का स्वरोजगार अपनाने लग गई है। महिलाओं को स्वाबलम्बी बनाने और उद्यमिता के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने पर उत्तराखंड सरकार  के द्वारा इन्हें “तीलू रौतेली“ जैसे राज्य स्तरीय सम्मान से नवाजा है। इसके अलावा इन्हें महिला उधमिता को एक ऊंचाई देने के लिए  विभिन्न सामाजिक संगठनों ने अनेकों बार सम्मानित किया है।

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