पंचकोसी यात्रा हुई सम्पन्न ,सैकड़ों लोग हुए शामिल
राजेश रतूड़ी
उत्तरकाशी । हर वर्ष चैत्र के महीने में त्रयोदशी को पंचकोसी (वारुणी) यात्रा के तहत वरुणावत पर्वत की पैदल परिक्रमा की जाती है.
अन्य वर्षों के मुकाबले इस वर्ष पंचकोसी यात्रा में श्रद्धालुओं की कमी देखने को मिली पिछले वर्षों की अपेक्षा काफी कम श्रद्धालु ही पंचकोसी यात्रा करने को निकले हे।.
करीब 15 किमी लंबी इस पदयात्रा के मार्ग पर बड़ेथी संगम स्थित वरुणेश्वर, बसूंगा में अखंडेश्वर, साल्ड में जगरनाथ और अष्टभुजा दुर्गा, ज्ञाणजा में ज्ञानेश्वर और व्यास कुंड, वरुणावत शीर्ष पर शिखरेश्वर तथा विमलेश्वर महादेव, संग्राली में कंडार देवता, पाटा में नर्वदेश्वर मंदिर में जलाभिषेक और पूजा-अर्चना का सिलसिला शाम तक चलता रहा.
वरुणावत पर्वत से उतरकर श्रद्धालुओं ने गंगोरी में असी गंगा और गंगा के संगम पर स्नान के बाद उत्तरकाशी शहर के विभिन्न मंदिरों में पूजा-अर्चना व जलाभिषेक के साथ काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचकर यात्रा संपन्न मानी जाती हे.
नागणी देवी मन्दिर में भी भक्तों का तांता लगा रहा
बलखिल्य पर्वत माँ नागणी देवी मंदिर मे हज़ारों श्रद्धांलुओं ने माँ नागणी देवी के दर्शन कर वारूणि यात्रा का पुण्य लाभ उठाया।। 9000 फ़ीट ऊचाई पर माँ नागणी देवी का मंदिर हिमालाय के श्वेत पर्वतों के चारों तरफ है।। चिलमुड़ गाँव के ग्रामीणो ने भंडारे का फलाहर आदि यात्रियों को खिलाये।।
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